UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों पारा हाई है। वजह साफ है-साल 2027 के विधानसभा चुनाव। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सियासी दलों के पैंतरे भी बदलने लगे हैं। इस बीच, AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की तरफ से विपक्षी दलों को दी गई 2 अक्टूबर की डेडलाइन आज पूरी हो गई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि जिस गठबंधन की उम्मीद में ओवैसी ने ये दांव चला था, उधर से सन्नाटा पसरा हुआ है।
सपा और कांग्रेस की तरफ से क्यों साधी गई है चुप्पी?
सितंबर महीने में कानपुर की एक रैली से ओवैसी ने बड़ा सियासी दांव चला था। उन्होंने साफ-साफ कहा था कि अगर बीजेपी को सत्ता में आने से रोकना है, तो विपक्ष को साथ आना चाहिए और AIMIM को भी इस कुनबे में शामिल करना चाहिए। इसके लिए उन्होंने 2 अक्टूबर तक का वक्त भी दिया था।
लेकिन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के खेमे से इस पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई। अखिलेश यादव पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि 2024 में जो 'इंडिया' गठबंधन साथ था, वही 2027 का चुनाव भी लड़ेगा..यानी नए दलों की एंट्री के लिए फिलहाल कोई जगह नहीं है।
अखिलेश के लिए क्यों पेचीदा है ओवैसी का नाम?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो सपा के लिए ओवैसी को साथ लेना बहुत आसान नहीं है। इसके पीछे की मुख्य वजहें ये हैं:-
मुस्लिम वोटों की सियासत- यूपी का मुस्लिम वोटर सपा के 'पीडीए' (PDA) समीकरण की धुरी माना जाता है। सपा नहीं चाहती कि इस वोट बैंक में कोई बड़ी सेंध लगे।
त्रिकोणीय मुकाबला- अगर AIMIM अकेले चुनाव मैदान में उतरती है, तो कई मुस्लिम-बहुल सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है, जिससे समीकरण गड़बड़ा सकते हैं।
सीट शेयरिंग का गणित फिलहाल सपा और कांग्रेस के बीच ही सीटों के बंटवारे और संगठन को मजबूत करने को लेकर मंथन चल रहा है, ऐसे में तीसरे दल को जोड़कर खींचतान बढ़ाने से बचा जा रहा है।
अब ओवैसी के पास क्या-क्या विकल्प बचे हैं?
डेडलाइन खत्म होने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि ओवैसी क्या फैसला लेते हैं। उनके सामने मुख्य तौर पर दो रास्ते नजर आ रहे हैं।
छोट दलों से गठबंधन- ओवैसी उन दलों या मोर्चों के साथ हाथ मिला सकते हैं जो सपा-कांग्रेस के मौजूदा गठबंधन से बाहर हैं।
तीसरा मोर्चा- आज के बाद AIMIM अपने दम पर या अन्य छोटे दलों (जैसे आजाद समाज पार्टी या अन्य क्षेत्रीय संगठनों) को साथ लेकर एक नए मोर्चे का ऐलान कर सकती है।
रणनीति में बदलाव ओवैसी पहले भी कह चुके हैं कि पार्टी अपनी चुनावी रणनीति और गठबंधन का खुलासा 2 अक्टूबर के बाद करेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में यूपी के रण में कुछ नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
