हेल्थ

शादी से पहले 2 बार IVF फेल होने का दर्द झेल चुकी हैं स्वरा भास्कर, जानें IVF फेल होने होने के कारण क्या हो सकते हैं

IVF Treatment: स्वरा भास्कर ने शादी से पहले दो बार IVF असफल होने का अपना अनुभव साझा किया है। IVF में हर कोशिश का सफल होना जरूरी नहीं। जानिए IVF फेल होने होने के कारण क्या हो सकते हैं

Image

Swara Bhaskar IVF failed Treatment

IVF Treatment, Reason of IVF Failure: मां बनने की इच्छा जितनी निजी होती है, उसका सफर भी उतना ही इमोशनल हो सकता है। अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने हाल में अपने जीवन के इसी संवेदनशील दौर के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि शादी से पहले उन्होंने परिवार शुरू करने की इच्छा के चलते दो बार आईवीएफ की कोशिश की थी, लेकिन दोनों प्रयास सफल नहीं हुए।

    IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन को अक्सर उम्मीद की एक बड़ी किरण माना जाता है। लेकिन इसका हर प्रयास प्रेगनेंसी तक पहुंचे, ऐसा जरूरी नहीं है। असल में एग और स्पर्म के मिलने से लेकर बच्चे की शुरुआती अवस्था बनने और ओवरी में उसके ठहरने तक का सफर कई चरण होते हैं। इनमें किसी भी स्तर पर रुकावट आ सकती है। इसलिए IVF का असफल होना किसी एक व्यक्ति की गलती मानना सही नहीं है। जानिए IVF फेल होने के पीछे कौन-कौन से कारण हो सकते हैं।

    IVF फेल होने का मतलब क्या है?

    IVF में एग और स्पर्म को मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद उपयुक्त भ्रूण को ओवरी में ट्रांसफर किया जाता है। लेकिन हर फर्टिलाइज्ड एग आगे विकसित होकर स्वस्थ भ्रूण बने, यह जरूरी नहीं। ASRM के अनुसार, आम तौर पर परिपक्व एग्स में से सभी फर्टिलाइज नहीं होते और फर्टिलाइज्ड एग्स में से भी सभी ब्लास्टोसिस्ट तक विकसित नहीं हो पाते।

    एम्ब्रियो की क्वालिटी भी होती है जरूरी

    आईवीएफ में एग और स्पर्म से बना एम्ब्रियो सही तरह से डेवलप होना जरूरी होता है। कई बार एम्ब्रियो में क्रोमोसोम से जुड़ी प्रॉब्लम होने पर वह यूट्रस में ठीक से इंप्लांट नहीं हो पाता। उम्र बढ़ने के साथ ऐसी प्रॉब्लम की संभावना भी बढ़ सकती है।

    एग और स्पर्म की क्वालिटी

    आईवीएफ का रिजल्ट एग और स्पर्म की क्वालिटी पर भी डिपेंड करता है। एग की क्वांटिटी या क्वालिटी कम होना, एग का ठीक से मैच्योर न होना या स्पर्म की संख्या और मूवमेंट में प्रॉब्लम होने से फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो डेवलपमेंट में परेशानी आ सकती है।

    यूट्रस से जुड़ी प्रॉब्लम

    एम्ब्रियो को यूट्रस में जाकर इंप्लांट होना होता है। अगर यूट्रस में फाइब्रॉइड, पॉलिप, अंदरूनी स्कार टिश्यू या कोई दूसरी स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम हो, तो एम्ब्रियो के इंप्लांट होने में परेशानी आ सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर जरूरत के हिसाब से जांच की सलाह दे सकते हैं।

    हार्मोन्स का बैलेंस भी जरूरी

    प्रेग्नेंसी की प्रोसेस में हार्मोन्स की अहम भूमिका होती है। एग बनने में परेशानी, ओव्यूलेशन की प्रॉब्लम या हार्मोन्स से जुड़ी कुछ हेल्थ कंडीशन आईवीएफ के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार हार्मोन टेस्ट भी कर सकते हैं।

    आईवीएफ का एक अटेम्प्ट फेल होने पर हमेशा कोई एक क्लियर रीजन सामने आए, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार सभी टेस्ट नॉर्मल होने के बावजूद प्रेग्नेंसी नहीं हो पाती। आईवीएफ हर व्यक्ति के लिए अलग एक्सपीरियंस होता है। अगर किसी का आईवीएफ अटेम्प्ट सफल नहीं होता, तो डॉक्टर एज, एग और स्पर्म की क्वालिटी, एम्ब्रियो और यूट्रस समेत कई फैक्टर्स को देखकर आगे की सलाह देते हैं।

    डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी रिसर्च पर आधारित है और यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है।

    Avni Bagrola
    अवनी बागरोलाauthor

    अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

    और पढ़ें
    End of Article