देशभर में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर चल रही बहस के बीच गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने 97 ऐसे मतदाताओं को लेकर स्थिति स्पष्ट की है, जिनके नाम फरवरी 2026 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। कार्यालय के मुताबिक, इनमें से 88 मतदाताओं ने Form 6 दाखिल कर दिया है और उनके आवेदन स्वीकार कर लिए गए हैं। फॉर्म 6 का इस्तेमाल पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए करते हैं। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए भी इसी फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है।
गोवा सीईओ कार्यालय की ओर से गुरुवार को साझा की गई स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, 97 मामलों में से 88 लोगों के फॉर्म 6 स्वीकार किए जा चुके हैं। वहीं, तीन लोग पुर्तगाली पासपोर्ट धारक हैं, जबकि छह मतदाता फिलहाल भारत से बाहर हैं। सीईओ कार्यालय ने बताया कि विदेश में रह रहे इन मतदाताओं से संपर्क स्थापित करने और आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारी प्रयास कर रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ था विवाद?
गोवा के इन 97 मतदाताओं का मामला तब चर्चा में आया, जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि सत्यापित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जा सके, क्योंकि निर्वाचन आयोग का सॉफ्टवेयर अपडेट दर्ज करने की अनुमति नहीं दे रहा था। इसके बाद गोवा सीईओ कार्यालय ने बताया था कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने इन 97 मतदाताओं के घरों का अलग-अलग दौरा किया था, ताकि फॉर्म 6 की प्रक्रिया पूरी कराई जा सके। 24 सितंबर को सीईओ कार्यालय ने कहा था कि इनमें से कई लोगों का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा चुका है, जबकि बाकी मामलों पर प्रक्रिया चल रही है। कार्यालय ने यह भी दोहराया था कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर नहीं रहेगा।
अब चलेगा विशेष अभियान
गोवा सीईओ कार्यालय ने गुरुवार को बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर राज्य में छूटे हुए पात्र मतदाताओं और नए पात्र युवा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का फोकस उन पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने पर होगा, जिनका नाम किसी वजह से छूट गया है। इसके अलावा पहली बार मतदान के योग्य हुए युवाओं को भी पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
सीईओ कार्यालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस सुविधा का लाभ उठाएं और यह सुनिश्चित करें कि उनका नाम मतदाता सूची में विधिवत दर्ज हो। कार्यालय के मुताबिक, नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि कोई भी पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे।
