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साल में 13 बार रिचार्ज कराने का झंझट होगा खत्म? सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को दिए ये निर्देश

28 Days Recharge Plan To End Soon: टेलीकॉम इंडस्ट्री का कहना है कि हर महीने के दिनों की संख्या अलग-अलग होती है, इसलिए 30 दिन का प्लान अनिवार्य करने से भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी, हालांकि जियो और एयरटेल के पास 30-31 दिनों वाले प्लान पहले हैं लेकिन इनकी कीमतें अधिक हैं।

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28 Days Recharge Plans To End?

देश में टेलीकॉम रिचार्ज प्लान को लेकर एक पुराना मुद्दा फिर चर्चा में है। साल 2016 में रिलायंस जियो के आने के बाद देश में एक नया ट्रेंड शुरू हुआ 28 दिन के रिचार्ज का, जबकि पहले 30 या 31 दिन के यानी मासिक रिचार्ज प्लान आते थे। 28 दिन की वैधता वाले “मंथली” प्लान के कारण यूजर्स को साल में 12 की बजाय 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ता है। इस मुद्दे को हाल ही में आम आदमी पार्टी से सांसद राघव चढ्ढा ने संसद में उठाया था।

सरकार का 30 दिन वाले प्लान पर जोर

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार टेलीकॉम कंपनियों को 30 दिन वाले प्लान को ज्यादा प्रमोट करने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने बताया कि ऐसे प्लान पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनकी जानकारी और प्रचार को बढ़ाने की जरूरत है ताकि उपभोक्ताओं को सही विकल्प मिल सके।

TRAI के नियम क्या कहते हैं?

टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने पहले ही निर्देश दिया है कि हर टेलीकॉम कंपनी को अपने प्लान में 30 दिन की वैधता वाला विकल्प देना जरूरी है। इसके साथ ही कंपनियों को वन-टाइम प्लान, कस्टम प्लान और अलग-अलग कैटेगरी में 30 दिन वाले प्लान शामिल करने होते हैं।

28 दिन प्लान खत्म करने की मांग

सांसद राघव चड्ढा ने सुझाव दिया कि 28 दिन वाले प्लान को पूरी तरह खत्म कर दिया जाना चाहिए और सभी “मंथली” प्लान को 30 दिन का बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि रिचार्ज खत्म होने के बाद कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल और मैसेज की सुविधा जारी रहनी चाहिए।

टैरिफ पर सरकार का रुख

इस मुद्दे पर मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि टैरिफ से जुड़े मामलों में सरकार सीधे दखल नहीं देती। भारत में टेलीकॉम सेक्टर “टैरिफ फॉरबेयरेंस” के तहत काम करता है, जहां कंपनियों को अपने प्लान और कीमत तय करने की स्वतंत्रता होती है, हालांकि TRAI निगरानी रखता है।

कंपनियों और इंडस्ट्री का पक्ष

टेलीकॉम इंडस्ट्री का कहना है कि हर महीने के दिनों की संख्या अलग-अलग होती है, इसलिए 30 दिन का प्लान अनिवार्य करने से भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। साथ ही, अगर वैधता बढ़ेगी तो कीमत भी बढ़ सकती है, जो ग्राहकों की जेब पर असर डाल सकती है।

अभी क्या है स्थिति?

वर्तमान में कंपनियां 28 दिन, 30 दिन, मासिक और सालाना कई तरह के प्लान ऑफर करती हैं। उदाहरण के तौर पर, कुछ कंपनियां 28 दिन और कैलेंडर मंथ दोनों विकल्प देती हैं, ताकि यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से चुन सकें।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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