ग्लास्गो: भारत की जूडिका यामिनी मौर्या ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को जूडो में तीसरा गोल्ड मेडल दिलाने से चूक गईं। महिलाओं के 57 किलो भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में उन्होंने इंग्लैंड की एसेल्या टॉपरैक(Acelya Toprak) को कड़ी टक्कर दी। नियत समय में 0-0 की बराबरी के बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में चला गया। यामिनी तीसरा शीदो (यलो कार्ड) मिलने की वजह से डिस्क्वालीफाई हो गईं और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। यामिनी मौजूदा राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए जूडो में मेडल जीतने वाली तीसरी भारतीय बनीं। पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में शिरकत करते हुए उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
इससे पहले महिलाओं के 48 किलो भारवर्ग में 23 वर्षीय अस्मिता डे ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया और भारत राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। इसके बाद पुरुषों के 60 किलो भारवर्ग में हर्ष सिंह ने गोल्ड मेडल जीतकर भारत की खुशी को दोगुना कर दिया। वो राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बनें। इसके बाद यामिनी मौर्य ने स्वर्ण रजत पदक अपने नाम करके ग्लास्गो में भारतीय अभियान का जूडो में अंत किया।
यामिनी ने दिलाया भारत को 11वां सिल्वर मेडल
28 वर्षीय यामिनी मौर्य गोल्ड मेडल भारत का ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 11वां रजत और कुल 20 वां पदक है। भारत इस पदक के साथ पदक तालिका में नौवें पायदान पर पहुंच गया है। भारत ने 23वें राष्ट्रमंडल खेलों में अबतक 5 गोल्ड, 11 रजत और 4 कांस्य पदक अपने नाम किए हैं।
वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में जूडो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय
यामिनी मौर्य साल 2023 के वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडो खिलाड़ी बनी थीं। उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया था। राष्ट्रमंडल खेलों से पहले इस साल यामिनी अफ्रीकी ओपन (डकार) और एशियाई ओपन (हांगकांग) में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही थीं।
