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संघर्ष और सफलताः 4 साल की उम्र में पैर गंवाया, फिर B.Ed किया और अब शिल्पा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में किया कमाल

Success Story Of Shipa K Shayla: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के महिला शॉट पुट F57 पैरा इवेंट में भारत की शिल्पा के. शायला ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करके भारत को कांस्य पदक दिलाया। इस खिलाड़ी की सफलता की कहानी करोड़ों फैंस को प्रेरित करने वाली है।

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कॉमनवेल्थ गेम्स में सफलता, शिल्पा की संघर्षपूर्ण कहानी (X)

भारतीय पैरा-एथलीट शिल्पा के. शायला ने ग्लासगो में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के महिला शॉट पुट F57 इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने के बाद अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि शब्दों से परे है। शिल्पा का यहां तक का सफर आसान नहीं रहा है, बल्कि वो जिंदगी में काफी संघर्ष के बाद इस मुकाम तक पहुंची हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने वाले प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए शिल्पा ने ANI से कहा, "यह इन गेम्स में मेरी पहली भागीदारी थी और मैं बहुत खुश हूं। मैं अपनी भावनाओं को शब्दों में बयां नहीं कर सकती। मैं उन सभी का शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ जिन्होंने मेरा साथ दिया। सत्यपाल सर ने मेरी बहुत मदद की। साथ ही, मेरे कोच ईशान एसडी सर और राघवेंद्र सर ने भी मुझे बहुत सपोर्ट किया। पुष्पा मैम भी कैंप में हमारे साथ थीं और उन्होंने भी हमारा साथ दिया। एक बार फिर, मैं उन सभी का धन्यवाद करना चाहती हूं जिन्होंने मेरा साथ दिया। साथ ही, मैं भारत सरकार और कर्नाटक सरकार का भी दिल से शुक्रिया अदा करना चाहती हूं।"

शिल्पा ने असल में 7.26 मीटर के अपने पर्सनल-बेस्ट थ्रो के साथ इवेंट में चौथा स्थान हासिल किया था, लेकिन एक आधिकारिक समीक्षा के बाद नाइजीरिया की यूचारिया इयियाज़ी को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद उन्हें ब्रॉन्ज़ मेडल मिला। संशोधित नतीजों में, साथी भारतीय शर्मिला धनखड़ ने 9.81 मीटर के सीज़न-बेस्ट थ्रो के साथ गोल्ड मेडल बरकरार रखा, जबकि घाना की ज़िनाबू इस्साह ने 8.65 मीटर के साथ सिल्वर मेडल जीता। इस तरह भारत को ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार एक ही इवेंट में दो पोडियम फिनिश मिलीं।

दो चैंपियन, एक जगह हुई ट्रेनिंग

पैरालंपिक कमेटी ऑफ़ इंडिया (PCI) के लिए भारतीय पैरा-एथलेटिक्स टीम के हेड कोच के.आर. सत्यनारायण ने शिल्पा के समर्पण की तारीफ़ की और उम्मीद जताई कि वह आगे भी इसी तरह तरक्की करती रहेंगी। ANI से बात करते हुए सत्यनारायण ने कहा, "शिल्पा की किस्मत अच्छी थी और उसने अच्छी ट्रेनिंग भी की थी। इसी इवेंट में हमारी शर्मिला ने गोल्ड मेडल जीता। शर्मिला और शिल्पा दोनों ने बेंगलुरु में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) में एक ही जगह ट्रेनिंग की थी। यह भारतीय पैरा-एथलेटिक्स के लिए एक शानदार पल है। भारत के ग्रामीण इलाकों में बहुत टैलेंट है। शिल्पा की तरफ़ से मैं आप सभी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। शिल्पा ने पिछले छह महीनों में कॉमनवेल्थ मेडल जीतने के मकसद से बहुत अच्छी ट्रेनिंग की है। उसने यहां अपनी ट्रेनिंग के मुकाबले और भी बेहतर प्रदर्शन किया। उसके कोच के तौर पर, मैं व्यक्तिगत रूप से बहुत खुश हूँ। शिल्पा के पास आने वाले पैरा एशियन गेम्स में भी मेडल जीतने का मौका है।" इस ब्रॉन्ज़ मेडल के साथ ही इन गेम्स में भारत के कुल मेडल्स की संख्या 10 हो गई है – जिसमें दो गोल्ड, पांच सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं।

शिल्पा की संघर्ष भरी कहानी

कर्नाटक के मैसूर ज़िले के कांचीगारा कोप्पलु गाँव की रहने वाली शिल्पा ने चार साल की उम्र में एक सड़क हादसे में अपना बायां पैर खो दिया था। बाद में उन्होंने पैरा-एथलेटिक्स में आने से पहले अपनी पोस्ट-ग्रेजुएशन और बैचलर ऑफ़ एजुकेशन (B.Ed.) की पढ़ाई पूरी की; इस खेल में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अपना पहला कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल जीता।

Shivam Awasthi
शिवम अवस्थीauthor

शिवम् अवस्थी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क के इंचार्ज हैं। इनको खेल पत्रकारिता में तकरीबन 17 सालों का अनुभव है। इनको क्रिकेट, फुटबॉल और टेनिस में खास रुचि है। उन्हें खेलना भी पसंद है और वो देहरादून में फुटबॉल व क्रिकेट इंटर डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप में विजेता टीम के कप्तान भी रहे। पत्रकारिता में कदम रखने के कुछ समय बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का संपूर्ण फील्ड कवरेज किया और कई ब्रेकिंग न्यूज दी। कई चर्चित भारतीय एथलीटों के इंटरव्यू लिए हैं। 2011 वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का ऑनफील्ड रहकर शहर-शहर घूमते हुए पूरा टीवी कवरेज किया। विश्व कप से पहले युवा विराट कोहली का इंटरव्यू किया। डिजिटल जैसे-जैसे आगे बढ़ा उन्हें ब्रेट ली, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, जैसे तमाम धुरंधरों के साक्षात्कार किए और 16 वर्षीय ऋषभ पंत का पहला डिजिटल इंटरव्यू किया जिसे इंग्लिश और हिंदी वेबसाइट पर काफी रीडरशिप मिली। उन्होंने स्पोर्ट्स मल्टी पॉडकास्ट भी किया। आईपीएल के 18 सीजन से ऑनफील्ड जुड़े रहे। अब तक तकरीबन 6000 से ज्यादा एक्सक्लूसिव स्टोरीज लिख चुके हैं। साल 2025 में खेल जगत के तमाम बड़े रिकॉर्ड्स व आंकड़ों को ट्रैक किया है और उन पर आर्टिकल तैयार किए हैं।

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