अपना पहला कॉमनवेल्थ गेम्स खेल रही भारत की निरुपमा देवी महिलाओं के 63 किग्रा भारवर्ग में मेडल से चूक गईं। निरुपमा अपने छह में से केवल एक सफल प्रयास कर सकीं और कुल वजन दर्ज करने में नाकाम रहीं। पच्चीस वर्षीय निरुपमा पूरे मुकाबले के दौरान लय में नहीं दिखीं। उन्होंने छह प्रयासों में केवल स्नैच में 93 किग्रा का एक सफल प्रयास किया। उन्होंने स्नैच में 93 किग्रा वजन अपने दूसरे प्रयास में उठाया जबकि वह पहले प्रयास में ऐसा करने में नाकाम रहीं थी। वह तीसरे प्रयास में 95 किग्रा वजन उठाने में भी असफल रहीं। स्नैच चरण के बाद वह पांचवें स्थान पर थीं।
पदक की दौड़ में बने रहने के लिए उन्हें क्लीन एवं जर्क में अच्छे प्रदर्शन की जरूरत थी। उन्होंने शुरुआती प्रयास के लिए 123 किग्रा वजन चुना। वह वजन को कंधों तक (क्लीन) लाने में सफल रहीं लेकिन उसे सिर के ऊपर स्थिर (जर्क) नहीं कर सकीं। भारतीय साथियों के जोरदार उत्साहवर्धन के बीच निरुपमा ने दूसरे प्रयास में फिर 123 किग्रा वजन उठाने की कोशिश की। इस बार भी वह क्लीन करने में सफल रहीं लेकिन जर्क के दौरान संतुलन खो बैठीं और बारबेल उनके पीछे गिर गई।
प्रतियोगिता में बने रहने और कांस्य पदक की उम्मीद कायम रखने के दबाव में वह तीसरे और अंतिम प्रयास में भी 123 किग्रा वजन उठाने में नाकाम रहीं। इसके साथ ही वह कुल वजन दर्ज नहीं कर सकीं और उनका अभियान समाप्त हो गया। कनाडा की टोक्यो ओलंपिक चैंपियन मॉड शेरोन ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखते हुए तीनों वर्गों (स्नैच, क्लीन एवं जर्क और कुल वजन) में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड के साथ ही तीसरा गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
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शेरोन ने स्नैच में 102 किग्रा और क्लीन एवं जर्क में 130 किग्रा से रिकॉर्ड कुल 232 किग्रा वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। इंग्लैंड की सारा डेविस स्मेल ने कुल 217 किग्रा (95 किग्रा और 122 किग्रा) वजन के साथ रजत पदक जीता जबकि नौरू की 17 वर्षीय फेमिली क्रिस्टी नोटे ने 216 किग्रा (100 किग्रा और 116 किग्रा) के साथ कांस्य पदक हासिल किया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में वेटलिफ्टिंग भारत के लिए सबसे सफल खेल रहा है जहां उसने अब तक के 10 पदक में से छह पदक जीते हैं। इसमें पैरा पावरलिफ्टिंग का एक पदक भी शामिल है।
