Uniform Civil Code : समान नागरिक संहिता कानून को लेकर मचे सियासी बवाल के बीच मंगलवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भोपाल पहुंचे। वे यहां UCC के विरोध में आयोजित जनसभा में प्रस्तावित कानून को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा। ओवैसी ने दावा किया कि UCC संविधान के कई प्रावधानों के विपरीत है। कहा कि यूसीसी संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 14 और 29 में दिए गए अधिकारों को प्रभावित करेगा। धार्मिक स्वतंत्रता को खत्म करके इस तरह का कानून लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी समानता के उद्देश्य से UCC लागू करने की कोशिश नहीं कर रही है, बल्कि इसका निशाना देश के 18 करोड़ मुसलमान हैं।
दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि 2029 से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू हो जाएगी, जिसके बाद सभी विपक्षी दलों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।
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AIMIM प्रमुख ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी पर भी हमला बोला। ओवैसी ने सोमवार को हैदराबाद में भी इसी मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी ने जिन राज्यों में UCC लागू किया है, वहां इसका उद्देश्य समानता स्थापित करना नहीं, बल्कि मुसलमानों को निशाना बनाना है।
देश की विविधता का किया जिक्र
ओवैसी ने भारत की बहुलतावादी व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि देश की पहचान ही विविधता और बहुलवाद से जुड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार द्वारा गठित विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में UCC को भारत के लिए न तो जरूरी और न ही वांछनीय बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह, बीजेपी और आरएसएस गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश कर रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि देश में अलग-अलग धर्मों और समुदायों की अपनी परंपराएं और व्यक्तिगत कानून हैं, ऐसे में सभी पर एक समान कानून थोपना उचित नहीं है।
क्या है UCC?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए धर्म से अलग एक समान व्यक्तिगत कानून लागू करना है। इसके तहत विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में सभी के लिए समान कानूनी प्रावधान किए जाने की बात है। बीजेपी लंबे समय से UCC को अपने प्रमुख कानूनी और सामाजिक सुधार एजेंडे का हिस्सा बताती रही है।
