महिला हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारतीय महिला टीम रविवार को करो या मरो मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उतरेगी। पिछले विश्व कप की कांस्य पदक विजेता आस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले को ’क्वार्टर फाइनल’ की तरह खेलना होगा। क्योंकि यहां हार का मतलब टूर्नामेंट में भारत के सफर की समाप्ति होगी।
दूसरे दौर के पहले मुकाबले में भारत को दुनिया की नंबर एक टीम नीदरलैंड्स ने शुक्रवार को 2-0 से हराया। यह टूर्नामेंट में भारत की पहली हार थी। डिफेंस और खासकर गोलकीपरों ने शानदार प्रदर्शन किया वरना सह मेजबान टीम की जीत का अंतर और अधिक हो सकता था। नये प्रारूप के तहत भारत को ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन से नहीं खेलना है। क्योंकि पहले दौर में दोनों के बीच मुकाबला हो चुका है और उसके ड्रॉ रहने से भारत के पास एक अंक है।
चीन के बड़े अंतर से हारने की करनी होगी दुआ
वहीं, नीदरलैंड्स अगर चीन को हरा देता है या ड्रॉ खेलता है तो आस्ट्रेलिया को हराने पर भारत सेमीफाइनल में पहुंच जायेगा। अगर चीन के हारने और भारत और आस्ट्रेलिया का मैच ड्रॉ रहने पर गोल औसत के आधार पर फैसला होगा। चीन ने अब तक तीन गोल गंवाये और तीन किये हैं जिससे गोल औसत शून्य है। जबकि भारत ने दो गोल किये और चार गंवाये हैं, जिससे औसत माइनस दो है और आस्ट्रेलिया ने तीन गोल किये जबकि पांच गंवाये है जिससे उसका भी औसत माइनस दो है। ऐसे में भारत को चीन के बड़े अंतर से हारने की भी दुआ करनी होगी।
जून में न्यूजीलैंड में एफआईएच नेशंस कप जीतने से पहले ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने वाली भारतीय टीम ने दो बार की विश्व कप चैम्पियन टीम के खिलाफ चार करीबी मैच खेले, जिनमें से दो गंवाये, एक जीता और एक ड्रॉ रहा था। ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन ग्राफ पिछले सत्र में बहुत अच्छा नहीं रहा है और 2025-26 प्रो लीग में टीम आठवें स्थान पर रही। चिली के सैंटियागो में विश्व कप क्वालीफायर में भी वह मेजबान टीम के बाद दूसरे स्थान पर रही थी, लिहाजा भारतीय टीम के पास उसे हराकर सेमीफाइनल में पहुंचने का यह सुनहरा मौका है।
खिलाड़ियों ने किया है साबित
विश्व रैंकिंग में नौंवे स्थान पर काबिज भारत ने अब तक अपने प्रदर्शन से काफी प्रभावित किया है। इंग्लैंड के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ रहे आखिरी पूल मैच में गोलकीपर बिछू देवी और सविता के साथ डिफेंस ने बारह पेनल्टी कॉर्नर बचाये। इसके बाद दुनिया की सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकर मानी जाने वाली नीदरलैंड की यिब्बी यानसेन को भी एक ही गोल पर रोक दिया। नीदरलैंड ने भारतीय गोल पर लगातार हमले बोले लेकिन एक भी फील्ड गोल नहीं कर सके। फर्स्ट रशर सलीमा टेटे ने भी जबर्दस्त चुस्ती का प्रदर्शन करते हुए कम से कम दो गोल बचाये।
भारत की 11 खिलाड़ियों का यह पहला विश्व कप है, जिसे देखते हुए अब तक के प्रदर्शन को साहसिक कहा जा सकता है। पहले ही मैच में चीन जैसी दिग्गज टीम को ड्रॉ पर रोककर ही इस टीम ने संकेत दे दिये थे कि वह टूर्नामेंट में सिर्फ भागीदारी के लिये नहीं आई है। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका पर 6-1 से जीत दर्ज की और इंग्लैंड को आखिरी मैच में गोलरहित ड्रॉ पर रोककर दूसरे दौर में जगह बनाई।
सविता, बिछू और दीपिका पर बड़ी जिम्मेदारी
इस टूर्नामेंट की सबसे अनुभवी खिलाड़ी 317 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी सविता और इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी 30 सेकंड में गोल बचाने वाली बिछू के साथ डिफेंस ने तो अच्छा प्रदर्शन किया ही है। नवनीत कौर की अगुवाई में फॉरवर्ड पंक्ति ने भी कई मौके बनाये। भारत के पास दीपिका जैसी ड्रैग फ्लिकर हैं जो एफआईएच नेशंस कप में छह गोल कर चुकी हैं।
