स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। अगर श्रीलंकाई बल्लेबाजों को सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करना है, तो उन्हें किसी भी तरह यह सुनिश्चित करना होगा कि मानव सुथार अच्छी शुरुआत न कर पाएं। गाले में हमने जो देखा, उसके आधार पर यह स्पष्ट है कि एक बार बाएं हाथ का स्पिनर जम जाए तो उससे पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाता है। अपने शुरुआती स्पेल में पहली ही गेंद पर विकेट लेने के बाद इस युवा भारतीय बाएं हाथ के स्पिनर ने दोनों पारियों में निर्णायक भूमिका निभाई। मैच में अंत में कुल 10 विकेट लिए और श्रीलंका पर भारत की 165 रन की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राजस्थान रणजी टीम के कोच अंशु जैन ने एक इंटरव्यू में कहा, मैंने कई ऐसे मैच देखे हैं जहां मानव पहले स्पेल में अच्छी गेंदबाजी करता है, फिर जिस लय में वह आता है, उससे खेल का रुख ही बदल जाता है। राजस्थान टीम के साथ, जब वह शुरुआती विकेट लेता है और पहली पारी में अच्छी गेंदबाजी करता है, तो वह पूरे मैच पर हावी रहता है। पहली पारी में जब उसने पहली ही गेंद पर विकेट लिया और अपना पहला स्पेल शानदार तरीके से फेंका, तो यह एक अच्छा संकेत था। मुझे लगा कि वह दूसरी पारी में पूरी तरह हावी रहेगा और उसने ठीक वैसा ही किया।'
क्लासिकल गेंदबाजी स्टाइल
जून में अफगानिस्तान के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू मैच में भी सुथार ने अपनी चौथी गेंद पर अपना पहला टेस्ट विकेट (अब्दुल मलिक) लिया और कुल मिलाकर छह विकेट हासिल किए। टेस्ट क्रिकेट में जहां स्पिनर आक्रामक बल्लेबाजों से बचने के लिए सपाट और तेज गेंदें फेंकने की कोशिश करते हैं। वहीं 24 वर्षीय सुथार की क्लासिकल गेंदबाजी शैली ताजी हवा के झोंके जैसी है। वह गेंद को हवा में उछालने से नहीं डरते, बल्कि बल्लेबाजों को चकमा देने और तेज टर्न का इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। गॉल टेस्ट की पहली ही गेंद पर यह बात साफ दिखी, जब उन्होंने दिनेश चांदीमल को विकेटकीपर ऋषभ पंत के हाथों कैच आउट कराया। उनकी गेंद तेज टर्न और उछाल वाली थी।

Manav Suthar
क्लासिक स्पिन गेंदबाजी के गुणों का प्रदर्शन करते हुए, युवा बाएं हाथ के गेंदबाज ने ड्रिफ्ट, ओवरस्पिन, उछाल और गेंद की उड़ान में विविधता का उपयोग करते हुए दोनों पारियों में श्रीलंका को ध्वस्त कर दिया। अब तक, उनका पारंपरिक दृष्टिकोण उनके लिए बहुत अच्छा काम कर रहा है और अपने पहले दो टेस्ट मैचों में उन्होंने 17 विकेट लिए हैं।
बल्लेबाजों को छकाने की कला जानते हैं सुथार
कोच जैन के अनुसार, सबसे अहम बात यह है कि एक ही एक्शन और आर्म रोटेशन के साथ, सुथार अपनी गति में बदलाव कर पाते हैं। वह लगातार गेंद को एक ही क्षेत्र में फेंकते हैं, लेकिन वह इसमें लगातार बदलाव करते हैं, वह कभी फ्लाइट होती हैं, कभी फ्लैट होती हैं। इसी से वह बल्लेबाज को चकमा दे पाते हैं। उनकी आर्म बॉल पर बल्लेबाज को लगता है कि गेंद शॉर्ट लेंथ की है, वे खेलने के लिए पीछे हटते हैं और बोल्ड या लेग बिफोर आउट हो जाते हैं। और जब वही गेंद वह थोड़ी धीमी गति से फेंकते हैं, तो बल्लेबाज आगे खेलने के लिए मजबूर हो जाता है और गेंद में ज्यादा स्पिन होती है। यही एक कला है, कि कैसे एक स्पिनर गति में बदलाव करके हवा में बल्लेबाजों को चकमा देता है।
राजस्थान के सीमावर्ती शहर श्री गंगानगर से आने वाले इस खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुरंत प्रभाव डालना वाकई सराहनीय है। बड़े महानगरों जैसी क्रिकेट सुविधाएं यहां न होने के बावजूद, इस बाएं हाथ के स्पिनर ने अपनी कड़ी मेहनत से सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं। भारत के स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने कहा कि अपनी निरंतरता के कारण यह युवा गेंदबाज टीम के लिए एक भरोसेमंद खिलाड़ी की तरह है। इसके अलावा कई दिग्गज स्पिनर्स ने भी मानव सुधार की तारीफ कर चुके हैं। खुद रवींद्र जडेजा ने सुथार की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं।
