भारत ने शॉट-पुट F57 कैटेगेरी में गोल्ड और सिल्वर मेडल पर कब्जा कर लिया। भारत के लिए गोल्ड सोमन राना से जबकि सिल्वर मेडल शुभम जुयाल ने जीता। सोमन का गोल्डन थ्रो उनके तीसरे प्रयास में आया जब उन्होंने 13.40 मीटर का थ्रो फेंका। शुभम जुयाल ने सीजन बेस्ट थ्रो कर सिल्वर मेडल अपने नाम किया जबकि ब्रोंज मेडल कैमरुन के कार्डिक इद्रीस के नाम रहा जिन्होंने 12.57 मीटर दूर गोला फेंका। यह इस कैटेगेरी में भारत का पहला गोल्ड मेडल है। इतना ही नहीं पहली बार ऐसा हुआ है कि गोल्ड और सिल्वर पर भारतीयों का कब्जा रहा है।
अदम्य साहस का जीता-जागता नमूना हैं सोमन
सोमन राना का जन्म मेघालय के शिलांग में हुआ था। दिसंबर 2006 के एक ब्लास्ट में उन्होंने अपना दायां पैर खो दिया था। 2017 में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी। सोमन के नाम एशियन पैरा गेम्स, वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स और वर्ल्ड पैरा चैंपियनशिप में मेडल है। इस मेडल से 43 साल के सोमन के नाम एक बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। सोमन की तरह सिल्वर मेडलिस्ट शुभम का पोडियम तक का सफर भी उतना ही प्रेरणादायक रहा है। रुड़की के रहने वाले शुभम अपने पिता की तरह सेना अधिकारी बनने का सपना देखते थे और उन्होंने 2022 में आर्मी कैडेट कॉलेज प्रवेश योजना की लिखित परीक्षा पास की थी। हालांकि, उसी साल एक भीषण मोटरसाइकिल दुर्घटना में उनका पैर काटना पड़ा, जिससे उन्हें अपना यह सपना छोड़ना पड़ा।रिकवरी के दौरान शुभम ने पैरा स्पोर्ट्स को चुना और कोच राकेश सिंह रावत के मार्गदर्शन में आर्मी पैरालिंपिक नोड में शामिल हो गए। भारत के कुछ अग्रणी पैरा एथलीटों के साथ प्रशिक्षण ने उन्हें F57 श्रेणी में देश के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में से एक के रूप में आगे बढ़ने में मदद की।
