स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शनिवार को ग्लासगो में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड सात गोल्ड मेडल जीतकर अपने अभियान का शानदार समापन किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के एक ही संस्करण में मुक्केबाजी में सात स्वर्ण पदक जीतने वाला भारत पहला देश बन गया। इससे पहले इंग्लैंड ने दो बार छह-छह स्वर्ण पदक (लंदन 1934 और गोल्ड कोस्ट 2018) जीते थे, जबकि कनाडा ने एडिनबर्ग 1986 में इस उपलब्धि की बराबरी की थी।
ग्लासगो 2026 में फाइनल में पहुंचने के साथ ही भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में अपना सबसे सफल मुक्केबाजी अभियान पहले ही सुनिश्चित कर लिया था। इसने गोल्ड कोस्ट 2018 के नौ पदकों, जिनमें तीन स्वर्ण शामिल थे, के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
इन बॉक्सरों ने नाम किया रोशन
मुक्केबाजी के अंतिम दिन साक्षी चौधरी (महिला 51 किग्रा), प्रीति पवार (महिला 54 किग्रा), जैस्मिन लैम्बोरिया (महिला 57 किग्रा), प्रिया घंघास (महिला 60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (महिला 70 किग्रा), सचिन सिवाच (पुरुष 60 किग्रा) और अंकुश पंघाल (पुरुष 80 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीतकर पोडियम के शीर्ष स्थान पर कब्जा किया। वहीं, ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (महिला 75 किग्रा), जदुमणि सिंह (पुरुष 55 किग्रा) और नरेंद्र बेरवाल (पुरुष +90 किग्रा) फाइनल में हार गए और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
इंग्लैंड ने भी रचा इतिहास
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में शनिवार को मेंस के 90+kg कैटेगरी में नरेंद्र के सिल्वर मेडल जीतने के साथ ही भारत ने बॉक्सिंग कॉम्पिटिशन का समापन हुआ। पुरुषों के 90+kg फाइनल में इंग्लैंड के डमार थॉमस ने नरेंद्र को हरा दिया। नरेंद्र सर्वसम्मति से 0-5 के फैसले से हार गए। गौरतलब है कि इंग्लैंड ने भी ग्लासगो 2026 में भारत के बराबर 10 मुक्केबाजी पदक जीते। इंग्लैंड के खाते में 4 गोल्ड, तीन सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल आए।
1970 में आया था पहला मेडल
भारत सात गोल्ड और तीन सिल्वर मेडल के साथ बॉक्सिंग मेडल टैली में सबसे ऊपर रहा और कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। शिवाजी भोंसले ने 1970 के कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतकर इतिहास में पहली बार भारत को बॉक्सिंग में मेडल दिलाया था। इसके बाद मोहम्मद अली कमर ने 2002 के संस्करण में भारत के लिए बॉक्सिंग का पहला गोल्ड पदक जीता। वहीं, मैरी कॉम (2018) कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं।
