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विवादों का फुटबाल विश्व कप ! समलैंगिंकता, रिश्वत और श्रमिकों की मौत पर उठे सवाल

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 18, 2022, 07:14 PM IST

FIFA World Cup 2022: FIFA के सबसे ताकतवर प्रशासक रह चुके सेप ब्लाटर ने यह कहकर सनसनी फैला दी है कि फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी के लिए कतर को चुनना एक गलती थी। कतर में 20 नवंबर से शुरू हो रहे फीफा वर्ल्ड कप में समलैंगिंकता,श्रमिकों के अधिकार को लेकर विवाद खड़े हो गए हैं।

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कतर में 20 नवंबर से फीफा विश्व कप

KEY HIGHLIGHTS
  • कतर में समलैंगिंकता गैर कानूनी है।
  • कतर को मेजबानी देने को लेकर रिश्वत जैसे गंभीर आरोप भी लग चुके हैं।
  • इसके अलावा श्रमिकों के मानवाधिकार का मामला भी सुर्खियों मे हैं।

Football World Cup 2022: शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि जिस देश को फुटबाल विश्व कप की मेजबानी दी गई, उसे लेकर FIFA के उस अधिकारी को ही दुख हो रहा है। जिसने उसे मेजबानी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। एक समय FIFA के सबसे ताकतवर प्रशासक रह चुके सेप ब्लाटर ने यह कहकर सनसनी फैला दी है कि फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी के लिए कतर को चुनना एक गलती थी। कतर में 20 नवंबर से शुरू हो रहे फीफा वर्ल्ड कप को अगर विवादों का विश्व कप कहा जाय तो यह कहीं से कम नहीं होगा। क्योंकि इसको मेजबानी मिलने , समलैंगिकता, मानवाधिकार को लेकर इतने सवाल उठ रहे हैं, कि फुटबाल विश्व कप शुरू होने से पहले ही विवादों में पड़ गया है।

मेजबानी मिलने में रिश्वत का आरोप

विश्व कप की जब साल 2010 में कतर को मेजबानी मिली, उसी समय से उसको लेकर सवाल उठ रहे थे। फीफा पर यह आरोप लगा था कि उसके कुछ निर्णायक सदस्यों ने रिश्वत लेकर कतर के पक्ष में वोट दिया था। इस मामले में स्विटरजलैंड और अमेरिका में कई तरह की जांच प्रक्रिया भी अपनाई गई थी। हालांकि बाद में फीफा ने साल 2017 में रिश्वत के मामले में कतर क्लीन चिट दे दी थी।

श्रमिकों के अधिकार और मौत का मामला

इस तरह कतर पर, मानवाधिकार कानूनों के उल्लंघन का भी आरोप लगा है। असल में विश्व कप की तैयारियों के लिए, कतर में दुनिया भर में श्रमिकों को बुलाया गया था। इस दौरान एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में श्रमिकों के मानवाधिकार उल्लंघन की बात सामने आई। आरोप है कि श्रमिकों को घंटों काम कराया गया, उन्हें छुट्टियां नहीं मिली। बीबीसी के अनुसार कई रिपोर्ट्स का कहना है कि तैयारियों में करीब 6000 श्रमिकों की मौत हुई। हालांकि कतर सरकार ने केवल 37 श्रमिकों की बात स्वीकार की है।

कतर में कफाला सिस्टम के तहत ही कोई विदेशी मजदूर काम के लिए जा सकता है। इस सिस्टम के तहत आने वाले मजदूर पर एक तरह से काम देने वाली कंपनी का अधिकार होता है। इस व्यवस्था को लेकर भी दुनिया भर में सवाल उठे हैं। हालांकि बीच में नियमों में ढील भी दी थी। इसके बावजूद वह निशाने पर है।

समलैंगिंकों का बायकॉट

विश्व कप के आयोजन के एंबेसडर खालिद सलमान के एक बयान ने LGBTQ फुटबाल प्रेमियों में खलबली मचा दी है। उन्होंने एक बयान में कह दिया है कि समलैंगिकता एक मानसिक रोग है। इसके बाद से दुनिया भर में बवाल मच गया है। और अब तो दुनिया का LGBTQ समुदाय भी कतर में विरोध में उतर गया है। असल में कतर में समलैंगिकता गैर कानूनी है। समलैंगिक लोगो को 10 साल की सजा का प्रावधान हैं।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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