Rishabh Pant advice: भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) का मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का आकर्षण स्वाभाविक है, लेकिन युवा क्रिकेटरों को अपना ध्यान देश का प्रतिनिधित्व करने पर केंद्रित करना चाहिए। उनका कहना है कि अगर युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में जगह बना लेते हैं, तो आईपीएल जैसे टूर्नामेंट्स में सफलता स्वतः ही मिल जाती है।
देश के लिए खेलने का था सपना
ऋषभ पंत, जो 2017 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू कर चुके हैं, ने जिओ हॉटस्टार (Jio Hotstar) से बातचीत में कहा, "बचपन से मेरा एक ही सपना था, भारत की तरफ से खेलना। मैंने कभी आईपीएल में खेलने के बारे में नहीं सोचा। मुझे लगता है कि लोग आज आईपीएल पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। निश्चित तौर पर यह बहुत बड़ा मंच है, लेकिन मेरा मानना है कि अगर आपका लक्ष्य देश की तरफ से खेलना है, तो चीजें अनुकूल होती जाएंगी और इनमें आईपीएल भी शामिल है।"
पंत ने आगे कहा, "यदि आप इस तरह की बड़ी सोच रखते हैं, तो सफलता आपका अनुसरण करेगी। मैं हमेशा सोचता था कि मुझे एक दिन भारत की तरफ से खेलना है, और ईश्वर के आशीर्वाद से मुझे 18 साल की उम्र में यह मौका मिला। मैं इसके लिए आभारी हूं।"
आक्रामक बल्लेबाजी और ट्रेडमार्क शॉट
ऋषभ पंत को उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और एक हाथ से छक्का मारने के ट्रेडमार्क शॉट के लिए जाना जाता है। हालांकि, अक्सर इस शॉट को खेलते समय उनका बल्ला हाथ से छूट जाता है। इसके बारे में पंत ने बताया, "मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मेरे निचले हाथ की ग्रिप ढीली होती है। मैं अपने निचले हाथ का उपयोग केवल थोड़ी मदद के लिए करता हूं, लेकिन कभी-कभी यह हावी हो जाता है। इसलिए मैं अपने ऊपरी हाथ की ग्रिप को कसकर (tight) रखता हूं।"
उन्होंने आगे कहा, "जब गेंद बहुत अधिक बाहर या शॉर्ट पिच होती है, तो शॉट लगाना आसान नहीं होता। इस तरह के शॉट खेलने में सफलता की दर 30 या 40 प्रतिशत हो सकती है, लेकिन मैच की परिस्थितियों को देखते हुए मैं यह जोखिम लेने के लिए तैयार रहता हूं। मेरी मानसिकता इसी तरह की है।"
जिमनास्टिक का फायदा
ऋषभ पंत ने यह भी बताया कि बचपन में जिमनास्टिक करने का उन्हें क्रिकेट में काफी फायदा मिला। उन्होंने कहा, "मैं बचपन में जिमनास्टिक करता था। मेरे जिमनास्टिक कोच हमेशा मुझसे कहते थे कि यह जीवन में बहुत काम आएगा। भारतीय टीम के हमारे ट्रेनर बासु सर ने एक बार मुझसे कहा था कि अपने जिम्नास्टिक कोच को धन्यवाद देना, क्योंकि उन्होंने बचपन में जो कुछ भी आपको सिखाया था, उसका आज भी आपको फायदा मिल रहा है।"
(भाषा)
