तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में सिराज को मुख्य तेज गेंदबाज की भूमिका निभानी होगी। उन्हें प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर ब्रार और आकिब नबी का भी मार्गदर्शन करना होगा। सिराज के लिए यह भूमिका नई नहीं है। बुमराह की गैरमौजूदगी में वह कई बार टीम की तेज गेंदबाजी की अगुआई कर चुके हैं।
पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम टेस्ट इसका उदाहरण है। बुमराह के कार्यभार प्रबंधन के कारण उस मैच से बाहर रहने पर सिराज ने पहली पारी में 6 विकेट लेकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। सिराज ने उस पूरी सीरीज में 1113 गेंदें फेंकी थीं और 23 विकेट लिए थे।
बिन बुमराह चमकते हैं सिराज
हालांकि, 32 वर्षीय इस गेंदबाज को श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में इतनी गेंदबाजी करने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन उनकी भूमिका किसी भी तरह कम महत्वपूर्ण नहीं होगी। रोचक बात यह है कि बुमराह की गैरमौजूदगी में सिराज का प्रदर्शन और निखर जाते हैं। बुमराह के साथ गेंदबाजी करते हुए सिराज ने 29 टेस्ट में 90 विकेट लिए हैं और उनका औसत 32 रहा है।
बुमराह की गैरमौजूदगी में उन्होंने 17 टेस्ट में 50 विकेट लिए हैं और उनका औसत 25.4 रहा है। सिराज को चुनौती पसंद है और वह दबाव से पीछे नहीं हटते। इस टेस्ट सीरीज में सिराज की सबसे बड़ी ताकत उनकी यही आक्रामकता होगी। धीमी पिचों पर उन्हें ज्यादा मदद मिलने की उम्मीद नहीं है।
सही वेरिएशन से करते हैं बल्लेबाजों को परेशान
सिराज के पास हालांकि, सपाट पिचों पर भी साधारण और अचानक चौंकाने वाली गेंदों का सही मिश्रण करके बल्लेबाजों को परेशान करने में सक्षम हैं। जरूरत के समय विकेट निकालने की उनकी खास क्षमता है। इसके अलावा निचले क्रम में बल्ले से तेज रन बनाने की उनकी क्षमता भी उन्हें उपयोगी खिलाड़ी बनाती है।
हाल ही में कोलंबो में श्रीलंका क्रिकेट एकादश के खिलाफ अभ्यास मैच में हैदराबाद के इस खिलाड़ी ने लगातार तीन छक्के लगाकर भारत को जीत दिलाई थी। ऐसे में भारतीय टीम के लिए श्रीलंका की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सिराज तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।
