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फरीदाबाद में बोरवेल में गिरी मासूम, NDRF ने शुरू किया रेस्क्यू; 10 साल से खुला था नगर निगम का बोरवेल

हरियाणा के फरीदाबाद के सीही गांव में ढाई साल की बच्ची खेलते समय बोरवेल में गिर गई, जिसको बचाने के लिए एनडीआरएफ की टीमें रेस्क्यू कर रही हैं।

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फरीदाबाद में बोरवेल में गिरी मासूम

फरीदाबाद : हरियाणा के फरीदाबाद के सीही गांव में रविवार को एक ढाई साल की बच्ची खेलते समय बोरवेल में गिर गई। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम भी मौके पर पहुंच गई है और बच्ची को बोरवेल से निकालने के लिए राहत एवं बचाव कार्य जारी है। फिलहाल बचाव दल बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रयास कर रहा है। प्रशासन की टीमें भी मौके पर मौजूद हैं और पूरे अभियान की निगरानी की जा रही है।

10 साल से बंद था नगर निगम का बोरवेल

पीटीआई/भाषा के हवाले से बच्ची के पिता रामदीन के अनुसार, बोरवेल फरीदाबाद नगर निगम का है और करीब 10 साल से बंद था। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले उसका ढक्कन हटा दिया गया था। पुलिस ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले रामदीन गांव में मजदूरी करते हैं। घटना के समय वह काम पर थे, तभी ग्रामीणों ने उन्हें सूचना दी कि उनकी बेटी बोरवेल में गिर गई है।

घटना की सूचना मिलने के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम ने बचाव अभियान शुरू किया। पुलिस ने बताया कि अंधेरा होने के कारण बोरवेल के आसपास रोशनी की व्यवस्था की गई और उसमें कैमरा उतारा गया। पुलिस ने बताया कि कैमरे की फुटेज में बोरवेल के अंदर कुछ पत्थर दिखाई दिए। ग्रामीणों ने बताया कि बोरवेल कई वर्षों से सूखा पड़ा था।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बोरवेल के अंदर से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी और ग्रामीणों को घटनास्थल से दूर किया जा रहा था। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ’’बच्ची बोरवेल में कितनी गहराई पर फंसी है, इसका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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