डरबन: दुनियाभर में लगातार टी20 लीग की संख्या का इजाफा हो रहा है। टी20 फॉर्मेट ने दुनियाभर में क्रिकेट की लोकप्रियता में इजाफा किया है लेकिन अब ये अंतरराष्ट्र्रीय क्रिकेट के लिए खतरा बनता दिख रहा है। खिलाड़ी अपनी राष्ट्रीय टीमों के साथ अनुबंध को छोड़कर विदेशी लीग्स में ज्यादा कमाई के लालच में जुड़ रहे हैं। ऐसे में आईसीसी ने टी20 लीग्स में भागीदारी से मोटी कमाई की फिराक में होने वाले खिलाड़ियों के सामूहिक संन्यास पर रोक लगाने के लिए डरबन में हो रही अपनी बोर्ड मीटिंग में बड़ा कदम उठाते हुए लीग में विदेशी खिलाड़ियों की संख्या को लेकर बड़ा फैसला किया है।
इतने विदेशी खिलाड़ी हो सकते हैं एकादश में शामिल
आईसीसी ने विभिन्न टी20 लीग में टीमों के लिए विदेशी क्रिकेटरों की सीमा तय कर दी है जिससे नई प्रतियोगिताओं में हर टीम अपनी एकादश में चार विदेशी खिलाड़ियों को ही खिला पाएंगी। यह मुख्य रूप से हर कोने में शुरू होने वाली टी20 लीग के लिए है जो खेल के अंतरराष्ट्रीय प्रारूप के लिए खतरा पैदा कर रहा है।
सात घरेलू खिलाड़ियों को देनी होगी एकादश में जगह
आईसीसी ने साथ ही फैसला किया है कि शीर्ष देशों के टी20 विशेषज्ञों के सामूहिक संन्यास को रोकने के लिए सभी नई प्रतियोगिताओं (विभिन्न टी20 लीग) में कम से कम सात घरेलू खिलाड़ियों या एसोसिएट सदस्यों के खिलाड़ियों को अपनी एकादश में शामिल करना होगा। संयुक्त राज्य अमेरिका में मेजर लीग क्रिकेट (एमएलसी) शुरू होने के साथ और सऊदी अरब भी भविष्य में एक महत्वाकांक्षी टी20 लीग की योजना बना रहा है और ऐसे में हितधारक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की रक्षा करना चाहते हैं। इसके अलावा अब मेजबान टी20 बोर्ड को ‘एकजुटता शुल्क’ भी देना होगा जो सरल शब्दों में एक विदेशी खिलाड़ी के घरेलू बोर्ड को दिया जाने वाला कमीशन है।
(भाषा इनपुट के साथ)
