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क्रिकेट में अब क्यों नहीं बनते लारा और सहवाग, पूर्व भारतीय दिग्गज ने कह दी बड़ी बात

पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने बताया कि 2000 के दशक में ऑस्ट्रेलिया ही ऐसी टीम थी जो टेस्ट में अपने समय से आगे थी। उनका मानना है कि टी20 क्रिकेट के दौर में विकसित हुई आक्रामक बल्लेबाजी ने टेस्ट क्रिकेट से धैर्य को खत्म कर दिया है।

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ब्रायन लारा और वीरेंद्र सहवाग (फोटो साभार- ICC)

पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि टी20 क्रिकेट के दौर में विकसित हुई आक्रामक बल्लेबाजी ने टेस्ट क्रिकेट से धैर्य को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से अब टेस्ट में लंबी पारियां और तिहरे शतक देखने को नहीं मिलते। हरभजन ने पीटीआई को दिए पॉडकास्ट इंटरव्यू में कहा, "टी20 के इस दौर में मौजूदा पीढ़ी के बल्लेबाजों में पहले जैसा धैर्य नहीं है। बहुत कम बल्लेबाज हैं जो टिककर 250 या 300 रन बना सकें। अगर आप इतने ज्यादा शॉट खेलेंगे तो आउट होने का खतरा हमेशा रहेगा। आजकल टेस्ट में तिहरा शतक बहुत कम देखने को मिलता है।"

हरभजन ने किया दिग्गजों को याद

उन्होंने पिछली पीढ़ी के दिग्गजों को याद करते हुए कहा, "पहले ब्रायन लारा थे, फिर क्रिस गेल, वीरेंद्र सहवाग और मैथ्यू हेडन, इन सभी ने तिहरे शतक लगाए। लारा ने तो 400 रन बनाए थे। एबी डिविलियर्स और जैक कैलिस ने भी बड़े दोहरे शतक लगाए।" गौरतलब है कि हाल के सालों में अजहर अली (2016), डेविड वार्नर (2019), हैरी ब्रूक (2024) और वियान मुल्डर (2025) ही तिहरा शतक लगा पाए हैं।

1998 में डेब्यू करने वाले हरभजन ने बताया कि 2000 के दशक में ऑस्ट्रेलिया ही ऐसी टीम थी जो टेस्ट में अपने समय से आगे थी। "बाकी टीमें एक दिन में 250 रन बनाती थीं, जबकि ऑस्ट्रेलिया हर बार 350 रन बनाने के बारे में सोचता था।" हरभजन ने कहा कि खेल की तेज रफ्तार ने स्पिनरों को भी बदलने पर मजबूर किया है। "अगर आप आक्रामक खेल के साथ खुद को नहीं ढालते तो पीछे रह जाते हैं। अब गेंदबाजों को लगातार डॉट गेंद डालकर दबाव बनाना होगा और बल्लेबाज को अलग शॉट खेलने पर मजबूर करना होगा।"

हरभजन बोले अब पूरी तरह बदल गया है टेस्ट

उन्होंने इंग्लैंड की 'बैजबॉल' शैली का उदाहरण देते हुए कहा, "इंग्लैंड एक दिन में 500 रन बनाने की कोशिश करता है और इसी कोशिश में 70-80 पर ऑल आउट भी हो सकता है। 2001 से अब तक टेस्ट पूरी तरह बदल गया है।" हरभजन को पुराने टेस्ट क्रिकेट का रोमांच ज्यादा याद आता है। "उस दौर में मैच पांच दिन चलता था और पांचवें दिन तक पता नहीं होता था कि कौन जीतेगा, वही असली आकर्षण था।" आईपीएल के प्रभाव पर उन्होंने कहा, "ध्यान लाल गेंद से सफेद गेंद की ओर खिसका है। आईपीएल बड़ा मंच है, जो रातोंरात स्टार और पैसा दोनों देता है। पहले अमोल मजूमदार जैसे खिलाड़ी 10 साल रन बनाने के बाद भी भारत के लिए नहीं खेल पाते थे, अब तीन फॉर्मेट होने से मौके ज्यादा हैं।"

Aditya Sahu
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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