गुवाहाटी टेस्ट में टीम इंडिया की हार के बाद प्रेस को संबोधित करते गौतम गंभीर(फोटो क्रेडिट BCCI)
साल था 1979,भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई उड़ान देने के लिए एसएलवी-3 मिशन पर काम कर रहा था। इसरो के तत्काोलीन चेयरमैन थे सतीश धवन थे और प्रोजेक्ट डायरेक्टर एपीजे अब्दुल कलाम। 1979 में मिशन फेल हुआ तो डॉ कलाम के हाथ पैर फूल गए। ऐसे में इसरो चेयरमैन सतीश धवन ने प्रेस के सामने मोर्चा संभाला और असफलता की सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए नाकाम रही टीम पर भरोसा जताते हुए अगले एक साल में सफल होने का वादा किया। ठीक एक साल बाद 1980 में टीम उनके भरोसे पर खरी उतरी और इस बार मिशन सफल रहा। लेकिन इस बार सतीश धवन ने खुद को प्रेस से दूर रखा और डॉ कलाम से मीडिया को संबोधित करने और इस उपलब्धि को दुनिया के साथ साझा करने का अनुरोध किया। सतीश धवन ने ऐसा करके बताया कि असफलता लीडर की होती है और जीत सामूहिक। लीडर का काम असफलता को आत्मसात करना और सफलता को साझा करना होता है।
लेकिन इस कहानी से उलट लीडरशिप का अलग रूप भारतीय क्रिकेट टीम की दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी टेस्ट में 408 रन के अंतर से हार के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देखने को मिला। गुवाहाटी में हार के साथ ही टीम इंडिया का दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में 0-2 के अंतर से सूपड़ा साफ हो गया। करारी हार के बाद टीम के हेड कोच गौतम गंभीर प्रेस के सवालों का सामना आए जरूर लेकिन उन्होंने टीम की हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने से साफ इनकार कर दिया। गंभीर ने कहा,'हार का दोष ड्रेसिंग रूम में मौजूद हर शख्स का है और इसकी शुरुआत मुझसे होती है। मैंने पहले भी कहा है कि हम साथ में जीतते हैं,साथ में हारते हैं। मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो किसी एक पर दोष मढ़े। हार का दोषी ड्रेसिंग रूम में बैठा हर शख्स है। टीम स्पोर्ट्स ऐसा ही होता है ये आसान सी बात है।' गंभीर की बात यहीं नहीं खत्म हुई उन्होंने टीम को पूर्व में मिली सफलता का श्रेय लेते हुए कहा, मेरे भविष्य का फैसला बीसीसीआई को करना है,लेकिन मैं वही व्यक्ति हूं जिसने इंग्लैंड में आपको युवा टीम के साथ अच्छे परिणाम दिलाए और मैं ही चैंपियंस ट्रॉफी में भी कोच था,मेरी लीडरशिप में ही टीम ने एशिया कप का खिताब जीता।'
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गंभीर के बयानों में अहंकार झलक रहा था। प्रेस से करारे सवालों का जवाब देते हुए गौतम टीम इंडिया का कोच बनने के बाद एक्स पर दिए अपने पहले बयान को भूल गए। लेकिन हम उन्हें वो बयान फिर से याद दिला देते हैं। गंभीर ने टीम इंडिया का हेड कोच नियुक्त किए जाने के बाद पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा था,'भारत मेरी पहचान है और अपने देश की सेवा करना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है। मैं एक नई भूमिका में वापसी करके सम्मानित महसूस कर रहा हूं लेकिन मेरा लक्ष्य हमेशा से वही रहा है,हर भारतीय को गर्व महसूस कराना। भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी 1.4 अरब भारतीयों के सपनों का भार संभालते हैं और मैं पूरी ताकत से कोशिश करूंगा कि ये सपने सच हों' गंभीर ने हर भारतीय को गर्व महसूस कराने का वादा किया था लेकिन इसके उलट फैन्स को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है उनके सपने लगातार चकनाचूर हो रहे हैं।
गौतम गंभीर ने चैंपियस ट्रॉफी में भारतीय टीम की खिताबी जीत का श्रेय लिया लेकिन वो ये बात साफ तौर पर भूल गए कि कप्तान रोहित शर्मा ने राहुल द्रविड़ को उस जीत का श्रेय सिएट अवार्ड्स के दौरान दिया था। रोहित ने कहा था कि ये टीम राहुल द्रविड़ की तैयार की हुई थी और उनकी रणनीति की वजह से ही टीम खिताब जीतने में सफल हुई। ऐसा लगता है कि चैंपियंस ट्रॉफी की जीत की क्रेडिट नहीं मिलने से गंभीर अबतक बौखलाए हुए हैं। उनके दिल में ये टींस है कि खिताबी जीत का सारा क्रेडिट रोहित शर्मा ले गए। ऐसे में उन्होंने भविष्य का हवाला देते हुए रोहित के हाथों से कप्तानी भी छीनकर शुभमन गिल के हाथों में सौंपने का फैसला चयनकर्ताओं के साथ मिलकर कर लिया।
रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया
गंभीर के टीम इंडिया का हेड कोच बनने के बाद टीम इंडिया का टेस्ट क्रिकेट में हाल बेहाल हो गया है। भारतीय टीम गंभीर के हेड कोच रहते टीम इंडिया ने 19 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें से 10 में उसे हार मिली है जबकि दो मैच ड्रॉ रहे हैं और केवल 7 में टीम जीत दर्ज कर सकी। इन सात में चार टेस्ट टीम इंडिया ने बांग्लादेश और वेस्टइंडीज जैसी लो रैंक टीमों के खिलाफ जीते हैं। वहीं भारतीय टीम को दो मैच में इंग्लैंड और एक में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत मिली है। लेकिन न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सरजमीं पर टीम का सूपड़ा साफ हो गया, लेकिन गौतम गंभीर अपनी गलती मानने को कतई तैयार नहीं हैं।
गंभीर टीम इंडिया के घर पर सबसे ज्यादा टेस्ट मैच गंवाने वाले कोच भी बन गए हैं। उनके कोच रहते पहली बार घर पर तीन मैच की टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम को हार का मुंह देखना पड़ा, 2015 के बाद भारतीय टीम को पहली बार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में हार मिली और 25 साल बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज गंवाई। इन शर्मनाक रिकॉर्ड्स को देखकर समझ में नहीं आ रहा कि गंभीर किस बात का दंभ अभी भी भर रहे हैं। उन्हें नैतिक आधार पर कोच पद से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि भारतीय टीम का गुरूर टेस्ट में घर का शेर कहलाने में था वो गुरूर भी न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार करारी हार के बाद चकनाचूर हो गया है।
(लेखक के विचार निजी हैं)
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