दिल्ली में आज यानी शनिवार 10 अक्बूटर को CJP के प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। इन सुरक्षा इंतजामों पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने दिल्ली के हालात की तुलना जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद की स्थिति से की।
PDP नेता महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि पहले विरोध प्रदर्शनों को रोकने और फिर उनके नहीं होने का दावा करने की रणनीति अपनाई जाती है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोध को कुचलकर बाद में उसकी मौजूदगी से इनकार करना सहमति के रूप में पेश किया जाता है।
महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था, ट्रेनों के रुकने और जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सड़कों को बंद किए जाने का जिक्र करते हुए इसे कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद के हालात की याद दिलाने वाला बताया।
'पहले प्रदर्शन कुचलो, फिर कहो कि कोई विरोध नहीं हुआ'
महबूबा मुफ्ती ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आज का दिल्ली का माहौल उन्हें जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के असंवैधानिक निरस्तीकरण के बाद की स्थिति की याद दिलाता है। उन्होंने दावा किया कि उस समय लोगों को घरों में बंद कर दिया गया था, इंटरनेट सेवाएं बंद थीं और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया था।
उन्होंने कहा कि उस समय बीजेपी ने दावा किया था कि किसी ने विरोध प्रदर्शन नहीं किया। महबूबा मुफ्ती के मुताबिक, दिल्ली में भी अगर प्रदर्शनकारियों की आवाजाही रोकी जाती है और सार्वजनिक परिवहन प्रभावित होता है, तो बाद में यह दावा किया जा सकता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किसी ने प्रदर्शन नहीं किया।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि पहले विरोध को कुचलना और फिर उसके होने से इनकार करना, जबरन थोपी गई चुप्पी को सहमति के तौर पर पेश करने जैसा है।
क्या है CJP का प्रदर्शन?
दिल्ली में CJP का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हो रहा है। प्रदर्शन के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने और जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर प्रतिबंधों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
2019 में हटाया गया था अनुच्छेद 370
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया था। इस फैसले के साथ ही तत्कालीन राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया था।
महबूबा मुफ्ती लंबे समय से केंद्र सरकार के इस फैसले की आलोचना करती रही हैं। दिल्ली में मौजूदा प्रदर्शन को लेकर उनकी टिप्पणी ने एक बार फिर अनुच्छेद 370 और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
