एशियाई खेलों में भारत का सामना करने की तैयारी में जुटे इंडोनेशिया के युवा हॉकी खिलाड़ियों के लिये ’चक दे इंडिया’ सिर्फ एक बॉलीवुड फिल्म नहीं है बल्कि उनकी प्रेरणा है जिसे देखकर उन्हें आत्मविश्वास मिला है कि कमजोर मानी जाने वाली टीमें भी कमाल कर सकती हैं। इंडोनेशिया के मिडफील्डर फर्डियन फातुर रहमान 2007 में आई शाहरूख खान की ’चक दे इंडिया’ के दीवाने हैं और कई बार यह फिल्म देख चुके हैं।
इस फिल्म में बताया गया है कि तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों से पार पाकर कैसे महिला हॉकी टीम विश्व चैम्पियन बनती है और कैसे एक कलंकित कोच कबीर खान बिखरी हुई टीम को एक विश्व कप विजेता भारतीय टीम में बदलकर अपना खोया सम्मान भी फिर हासिल करता है। टीम के एक अन्य सदस्य फिरदौस मुहम्मद ने भी यह फिल्म देखी है । इंडोनेशिया टीम के लगभग हर खिलाड़ी ने कम से कम एक बार तो यह टीम देखी ही है । इंडोनेशिया को एशियाई खेलों में 20 सितंबर को पूल ए में पहला मैच गत चैम्पियन भारत से खेलना है।
हांगझोउ एशियाई खेल 2023 में भाग ले चुके रहमान को कोच कबीर खान का शुरूआती रोलकॉल याद है जिसमें वह हर खिलाड़ी से पूछते हैं कि वह कहां से है और इसके बाद कहते हैं, "मुझे स्टेट के नाम ना सुनाई देते हैं , ना दिखाई देते हैं। सिर्फ एक मुल्क का नाम सुनाई देता है, इंडिया।"
रहमान ने कहा, "हां ,मुझे चक दे से प्रेरणा मिलती है। उस सीन में जब कोच खिलाड़ियों से पूछते हैं कि वह कहां से है। यह सीन मेरे दिमाग में छप गया है।" उन्होंने कहा, "मैं सुराबाया से हूं जहां बॉलीवुड फिल्मों का काफी क्रेज है और हॉकी पर बनी यह फिल्म आज भी देखी जाती है।" पिछले पांच साल से आउटडोर और इंडोर हॉकी खेल रहे फिरदौस का पसंदीदा सीन ’70 मिनट’ वाली कोच की स्पीच है। उन्होंने कहा, "तुम्हारे पास सत्तर मिनट है।"
इंडोनेशिया के लिये भारत के खिलाफ चुनौती 60 मिनट की है चूंकि अब हॉकी 15-15 मिनट के चार क्वार्टर में 60 मिनट की हो गई है। इंडोनेशिया के पास भी 20 सितंबर को 60 मिनट होंगे जिसमें उसे एशिया की सबसे दमदार टीम के खिलाफ अपनी काबिलियत दिखानी होगी। इसमें कोई बॉलीवुड पटकथा, कबीर खान या प्रेरक भाषण नहीं होगा और कोई ’सेकंड टेक’ भी नहीं होगा।
(भाषा)
