पुरी (ओडिशा): 57वीं सीनियर राष्ट्रीय खो-खो चैंपियनशिप का भव्य उद्घाटन पूरी के डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हो गया है। यह आयोजन ऐतिहासिक है, क्योंकि पहली बार सभी मैच मैट पर खेले जाएंगे। इसके अलावा, 40 पुरुष और 40 महिला टीमों की भागीदारी ने इसे सबसे बड़ा राष्ट्रीय खो-खो टूर्नामेंट बना दिया है। इस मेगा टूर्नामेंट का उद्घाटन समारोह भी शानदार रहा जिसमें देशभक्ति की छाप भी देखने को मिली।
देशभक्ति की धुन पर मार्चपास्ट
उद्घाटन समारोह में 'सारे जहां से अच्छा' की धुन पर पुरुष और महिला खिलाड़ियों ने मार्चपास्ट किया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर चैंपियनशिप की आधिकारिक शुरुआत की गई। इसमें खिलाड़ियों में देशभक्ति देखी गई।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से रंगारंग शाम
उद्घाटन समारोह में रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में कलाकारों ने लोक नृत्य प्रस्तुत किए। इसके अलावा, चैंपियनशिप ट्रॉफी की प्रदर्शनी ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
गणमान्य अतिथियों ने दी शुभकामनाएं
इस मौके पर भारतीय खो-खो संघ (KKFI) के अध्यक्ष सुधांशु मित्तल, महासचिव एमएस त्यागी, ओडिशा खो-खो एसोसिएशन के सचिव प्रद्युमन मिश्रा और राज्यसभा सांसद शुभाशीष खुंटिया मौजूद रहे।प्रद्युमन मिश्रा ने कहा, "मात्र 20 दिनों में हमने पुरी में यह राष्ट्रीय स्पर्धा सफलतापूर्वक आयोजित की। मैं KKFI और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करता हूँ।"शुभाशीष खुंटिया ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा, "खो-खो टीमवर्क और खेल भावना का प्रतीक है। मैं चाहता हूँ कि यह टूर्नामेंट नए रिश्ते बनाए और खिलाड़ी अपने जीवन में भी तरक्की करें।"
2032 ओलंपिक्स तक पहुंचाने का लक्ष्य
सुधांशु मित्तल ने कहा, "खो-खो अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है। हमारा लक्ष्य इसे 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स, 2032 एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में शामिल करवाना है। यह हमारे खिलाड़ियों के कौशल और समर्पण से ही संभव होगा।"
190 मैचों का ग्रैंड इवेंट
- 31 मार्च से 4 अप्रैल तक चलने वाली इस चैंपियनशिप में कुल 190 मैच होंगे।
- 160 लीग और 30 नॉकआउट मैच खेले जाएंगे।
- -पहले दिन ही 56 मैचों का आयोजन किया गया।
विश्व कप के बाद पहला बड़ा आयोजन
जनवरी 2025 में नई दिल्ली में खो-खो विश्व कप का आयोजन हुआ था, जिसमें 23 देशों की 39 टीमों ने भाग लिया था। भारत ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण जीता था। इसके बाद यह पहला प्रमुख राष्ट्रीय टूर्नामेंट है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। 57वीं सीनियर राष्ट्रीय खो-खो चैंपियनशिप न केवल खेल प्रेमियों के लिए बल्कि भारतीय खेल इतिहास के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगी। इस आयोजन से खो-खो को वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।
