अध्यात्म

Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या पर स्नान-दान के बाद करें पितृ सूक्त का पाठ, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति

Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या पर स्नान और दान का अपना खास महत्व है, यदि आप स्नान-दान के बाद पितृसूक्त का पाठ करते हैं, तो आपको पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है। आगे पढ़ें संपूर्ण पितृ सूक्त...

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वैशाख अमावस्या पर पितृ सूक्त का पाठ करना चाहिए

Vaishakh Amavasya 2026: हिंदू धर्म में वैशाख अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन पितरों की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। खासतौर पर पितृ सूक्त (Pitru Sukt) का पाठ इस दिन अत्यंत फलदायी माना गया है। स्नान और दान के बाद पितृसूक्त का पाठ करना चाहिए। वेदों में वर्णित पितृ सूक्त पितरों को समर्पित एक विशेष स्तुति है, जिसका नियमित पाठ करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। यह पाठ घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह पाठ विशेष लाभकारी माना गया है। आगे पढ़ें संपूर्ण पितृ सूक्त...

पितृ सूक्तम् - Pitru Suktam Lyrics

उदिताम् अवर उत्परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः।

असुम् यऽ ईयुर-वृका ॠतज्ञास्ते नो ऽवन्तु पितरो हवेषु॥1॥

अंगिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वनो भृगवः सोम्यासः।

तेषां वयम् सुमतो यज्ञियानाम् अपि भद्रे सौमनसे स्याम्॥2॥

ये नः पूर्वे पितरः सोम्यासो ऽनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठाः।

तेभिर यमः सरराणो हवीष्य उशन्न उशद्भिः प्रतिकामम् अत्तु॥3॥

त्वं सोम प्र चिकितो मनीषा त्वं रजिष्ठम् अनु नेषि पंथाम्।

तव प्रणीती पितरो न देवेषु रत्नम् अभजन्त धीराः॥4॥

त्वया हि नः पितरः सोम पूर्वे कर्माणि चक्रुः पवमान धीराः।

वन्वन् अवातः परिधीन् ऽरपोर्णु वीरेभिः अश्वैः मघवा भवा नः॥5॥

त्वं सोम पितृभिः संविदानो ऽनु द्यावा-पृथिवीऽ आ ततन्थ।

तस्मै तऽ इन्दो हविषा विधेम वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥6॥

बर्हिषदः पितरः ऊत्य-र्वागिमा वो हव्या चकृमा जुषध्वम्।

तऽ आगत अवसा शन्तमे नाथा नः शंयोर ऽरपो दधात॥7॥

आहं पितृन्त् सुविदत्रान् ऽअवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः।

बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पित्वः तऽ इहागमिष्ठाः॥8॥

उपहूताः पितरः सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु।

तऽ आ गमन्तु तऽ इह श्रुवन्तु अधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥9॥

आ यन्तु नः पितरः सोम्यासो ऽग्निष्वात्ताः पथिभि-र्देवयानैः।

अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तो ऽधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥10॥

अग्निष्वात्ताः पितर एह गच्छत सदःसदः सदत सु-प्रणीतयः।

अत्ता हवींषि प्रयतानि बर्हिष्य-था रयिम् सर्व-वीरं दधातन॥11॥

येऽ अग्निष्वात्ता येऽ अनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते।

तेभ्यः स्वराड-सुनीतिम् एताम् यथा-वशं तन्वं कल्पयाति॥12॥

अग्निष्वात्तान् ॠतुमतो हवामहे नाराशं-से सोमपीथं यऽ आशुः।

ते नो विप्रासः सुहवा भवन्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥13॥

आच्या जानु दक्षिणतो निषद्य इमम् यज्ञम् अभि गृणीत विश्वे।

मा हिंसिष्ट पितरः केन चिन्नो यद्व आगः पुरूषता कराम॥14॥

आसीनासोऽ अरूणीनाम् उपस्थे रयिम् धत्त दाशुषे मर्त्याय।

पुत्रेभ्यः पितरः तस्य वस्वः प्रयच्छत तऽ इह ऊर्जम् दधात॥15॥

वैशाख अमावस्या का महत्व

आज पड़ने वाली अमावस्या को वैशाख अमावस्या के रूप में जाना जाता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में इसे दर्श अमावस्या भी कहा जाता है। वैशाख का महीना धर्म, तपस्या और दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व रखता है, इसलिए इस अमावस्या की महत्ता और भी बढ़ जाती है। मान्यता है कि इस दिन पितरों के लिए तर्पण करना, तिल और जल का दान देना तथा पीपल वृक्ष की पूजा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह अमावस्या बेहद खास मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए आध्यात्मिक कार्य मानसिक शांति प्रदान करते हैं, नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते हैं और नए कार्यों की शुभ शुरुआत के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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