अध्यात्म

Vaishakh Amavasya Bhajan: वैशाख अमावस्या पर सुनें ये भजन, मिलेगा पितरों का आशीर्वाद

Vaishakh Amavasya Bhajan: वैशाख अमावस्या सिर्फ अपने पितरों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। इस दिन भजन गाकर आप अपने मन को शुद्ध कर सकते हैं और एक सकारात्मक ऊर्जा महसूस कर सकते हैं।

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वैशाख अमावस्या के भजन

Vaishakh Amavasya Bhajan: इस बार वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026 को पड़ रही है। इस दिन लोग खास तौर पर अपने पितरों को याद करते हैं। सुबह-सुबह पवित्र नदी में स्नान करना, तर्पण करना, श्राद्ध करना और मंत्र जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा माना जाता है कि भजन गाने और सुनने से वातावरण पवित्र होता है और मन को शांति मिलती है। साथ ही, पितर भी प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

भजन ना केवल भक्ति का माध्यम हैं, बल्कि यह हमारे मन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के भजन गाना बेहद फलदायी माना जाता है। आइए पढ़ते हैं कुछ सरल और भावपूर्ण भजन, जिन्हें आप वैशाख अमावस्या के दिन गा सकते हैं।

भगवान विष्णु के प्रसिद्ध भजन

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम,

राम नारायणम जानकी वल्लभम्।

कौन कहता है भगवान आते नहीं,

तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं॥

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,

गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम,

राम नारायणम जानकी वल्लभम्॥

कौन कहता है भगवान खाते नहीं,

बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।

कौन कहता है भगवान सोते नहीं,

माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं॥

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम,

राम नारायणम जानकी वल्लभम्॥

कौन कहता है भगवान आते नहीं,

तुम सुदामा के जैसे बुलाते नहीं।

कौन कहता है भगवान सुनते नहीं,

द्रौपदी की तरह तुम बुलाते नहीं॥

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम,

राम नारायणम जानकी वल्लभम्॥

2- जब भक्त बुलाते हैं, हरि दौड़े के आते हैं ॥

वो तो दीन और दुःखियों को ॥

आके गले लगाते हैं, हरि दौड़े के आते हैं,

जब भक्त बुलाते हैं...

द्रौपदी ने जब उन्हें पुकारा, दौड़े-दौड़े आ गए ।

भरी सभा में चीर बढ़ाकर, उसकी लाज बचा गए ॥

वो बहुत दयालु हैं, वो दया के सागर हैं,

वो चीर बढ़ाते हैं, हरि दौड़े के आते हैं,

जब भक्त बुलाते हैं...

अर्जुन ने जब उन्हें पुकारा, सारथी बनकर आ गए ।

गीता का उपदेश सुनाकर, उसका भ्रम मिटा गए ॥

वो ज्ञान सिखाते हैं, वो भ्रम मिटाते हैं,

वो गले लगाते हैं, हरि दौड़े के आते हैं,

जब भक्त बुलाते हैं...

धन्ना ने जब उन्हें पुकारा, ठाकुर बनकर आ गए ।

पत्थरों में दर्शन दिखा के, प्रेम का भोग लगा गए ॥

वो दर्शन दिखाते हैं, वो हल चलवाते हैं,

वो मान बढ़ाते हैं, हरि दौड़े के आते हैं,

जब भक्त बुलाते हैं...

मित्र सुदामा, द्वारे आए, दौड़े-दौड़े आ गए ।

दो मुठ्ठी सत्तू के बदले, उसका महल बना गए ॥

वो फ़र्ज़ निभाते हैं, वो गले लगाते हैं,

वो महल बनाते हैं, हरि दौड़े के आते हैं,

जब भक्त बुलाते हैं...

वैशाख अमावस्या के दिन भजन गाकर आप अपने मन को शुद्ध कर सकते हैं और एक सकारात्मक ऊर्जा महसूस कर सकते हैं। भक्ति, दान और श्रद्धा के साथ अगर आप यह दिन बिताते हैं, तो निश्चित ही आपको पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होगा और जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी।

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prabhat sharma
प्रभात शर्मा author

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–... और देखें

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