अध्यात्म

Som Pradosh Vrat Katha In Hindi: सोम प्रदोष व्रत आज, करना है भोलेनाथ को प्रसन्न तो पढ़ें ये पावन कथा, हर संकट होगा दूर

Som Pradosh Vrat Katha In Hindi (सोम प्रदोष व्रत कथा): आज सोम प्रदोष व्रत है जिसकी काफी महिमा बताई जाती है। इस दिन भगवान शिव की विधि विधान पूजा करके सोम प्रदोष व्रत की कथा जरूर पढ़ें। यहां देखिए सोमवार प्रदोष व्रत की कहानी।

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सोम प्रदोष व्रत कथा (pc: Canva)

Som Pradosh Vrat Katha In Hindi (सोम प्रदोष व्रत कथा): हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व है। प्रदोष व्रत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। ये व्रत भगवान शिव को समर्पित है। ऐसे में जो भी जातक यह व्रत करते हैं भोलेनाथ की कृपा से उनकी सभी मनोवांछ‍ित कामनाओं की पूर्ति होती है। अगर आप भी इस व्रत को रख रहे हैं तो आपको कथा जरूर पढ़ लेनी चाहिए। यहां से आप प्रदोष व्रत की कथा देखें-

पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। जिसके पति का स्वर्गवास हो गया था। अब उसका कोई आश्रयदाता नहीं था, इसलिए वह सुबह-सुबह ही अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल जाती थी। भिक्षाटन से ही वह खुद का और अपने पुत्र का पेट पालती थी। एक दिन ब्राह्मणी जब अपने घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में कराहता हुआ मिला। ब्राह्मणी उसे अपने घर ले आई। वह लड़का कोई और नहीं विदर्भ का राजकुमार था। शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बन्दी बनाकर उसके राज्य पर नियंत्रण कर लिया था, इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था।

राजकुमार ब्राह्मणी के घर रहने लगा। एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा तो वो उस पर मोहित हो गई। अगले दिन अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई। उसके माता-पिता को भी राजकुमार भा गया। कुछ दिनों बाद अंशुमति के माता-पिता को शंकर भगवान ने सपने में आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दिया जाए। अंशुमति के माता-पिता ने भगवान शिव के आदेशा का पालन करते हुए उन दोनों का विवाह करा दिया।

ब्राह्मणी प्रदोष व्रत करती थी। उसके व्रत के प्रभाव से और गंधर्वराज की सेना की सहायता से राजकुमार ने शत्रुओं को खदेड़ दिया और पिता के राज्य को पुनः प्राप्त कर लिया। राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बना दिया। ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के माहात्म्य से जैसे राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के दिन फिरे, वैसे ही भगवान शिव अपने अन्य सभी भक्तों के दिन भी फेरते हैं।

शिव जी की आरती | Shiv Ji ki Aarti

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा

ॐ जय शिव..

एकानन चतुरानन पंचानन राजे

हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे

ॐ जय शिव..

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे

त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे

ॐ जय शिव..

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी

चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी

ॐ जय शिव..

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे

ॐ जय शिव..

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता

जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता

ॐ जय शिव..

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका

प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका

ॐ जय शिव..

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।

नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी

ॐ जय शिव..

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे

कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे

ॐ जय शिव..

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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