Shubh Ashubh Sanket: दूध का इस्तेमाल न सिर्फ सेहत के लिए होता है, बल्कि हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ के लिए भी किया जाता है। आध्यात्मिक रूप से गाय के दूध का बहुत ही ज्यादा महत्व होता है। कच्चे दूध को शिवलिंग पर चढ़ाने के अलावा दूध का इस्तेमाल कथा-भागवत जैसे सभी मांगलिक कार्यों में किया जाता है। दूध के महत्व का वर्ण शकुन शास्त्र में भी किया गया है। इस शास्त्र में दूध को कई शुभ-अशुभ संकेतों से जोड़ कर देखा गया है। वहीं, वास्तुशास्त्र में दूध की तुलना चंद्रमा से करने के साथ इसका कारक माना गया है। वास्तु के अनुसार, रसोई में उबलता हुआ दूध गिरना बहुत बड़ा अपशकुन होता है। वास्तु में कहा गया है कि, अगर किसी के घर में दूध बार-बार गिर रहा है तो उसे चंद्र दोष लग सकता है। साथ ही इससे घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश होता है। आइए जानते हैं कि उबलता दूध गिरने पर क्या-क्या अशुभ संकेत होता है।
उबलता दूध गिरने के अशुभ संकेत
दूध का कभी-कभार उबलकर गिरना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर अक्सर ऐसा हो रहा है तो यह इस बात की तरफ इशारा हो सकता है कि घर में कोई वास्तु दोष है। वास्तु दोष के कारण घर में कभी न तो बरकत आती है और नहीं ही सुख-समृद्धि मिलती है। हमेशा पैसों की तंगी बनी रहती है।
वास्तु के अनुसार, घर का कोई सदस्य अगर किसी जरूरी काम से बाहर जा रहा हो और उसी समय अगर रसोई में उबलता दूध गिर जाए तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है। ऐसे में बहुत संभावना है कि आप जिस काम पर जा रहे हो, उसमें सफलता न मिल पाए।
वास्तुशास्त्र के अनुसार, उबलता दूध बार-बार गिरने से घर का कोई सदस्य मानसिक तौर पर बीमार पड़ सकता है। मान्यता है कि, गिरता दूध चंद्र दोष बढ़ाता है और इसकी वजह से घर में हमेशा तनाव की स्थिति बनी रहती है। साथ ही इसका नकारात्मक असर आर्थिक तौर पर भी पड़ सकता है।
दूध को उबालने के लिए आग का इस्तेमाल होता है। आग को मंगल का कारक माना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, मंगल और चंद्रमा एक-दूसर के घोर विपरीत होते हैं। इसलिए उबलते दूध का बार- बार आग पर गिरना परिवार में झगड़े का कारण बनता है। चंद्रमा और मंगल के मिलने से घर में दरिद्रता भी आती है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
