अध्यात्म

Satyanarayan Puja Vrat katha: हर कष्ट हरने वाली है सत्यनारायण व्रत कथा, कैसे संवरा लीलावती और कलावती का जीवन

Satyanarayan Puja Vrat katha (सत्यनारायण व्रत कथा,पूजन सामग्री लिस्ट, आरती): भगवान सत्यनारायण का व्रत हर महीने की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। इसमें भगवान विष्णु के सत्य स्वरूप की पूजा होती है। इस व्रत को संकट निवारण के लिए यह अत्यधिक फलदायी माना गया है। यहां पढ़ें सत्यनारायण व्रत कथा हिंदी में और जानें कैसे इस व्रत के प्रताप से संवरा लीलावती और कलावती का जीवन।

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सत्यनारायण व्रत कथा (Pic: Pinterest)

Satyanarayan Puja Vrat katha Vidhi: सत्यनारायण के व्रत में भगवान विष्णु के सत्य स्वरूप की पूजा होती है। यह व्रत हर मास में पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। इसके अलावा विवाह, संतान प्राप्ति, सुख-समृद्धि आदि की कामना से गुरुवार को भी कई भक्त यह व्रत करते हैं और सत्यनारायण व्रत की कथा का पाठ करते हैं। सत्यनारायण भगवान की जय के साथ इस कथा का पाठ आरंभ किया जाता है और अंत में उनकी आरती और जयकार के साथ समाप्त किया जाता है।

श्री सत्यनारायण व्रत कथा कथा हिंदी में

सत्यनारायण के व्रत की कथा का पाठ पांच अध्यायों में किया जाता है। यहां पांचों अध्याय भक्तों के लिए दिए गए हैं।

श्री सत्यनारायण व्रत कथा प्रथम अध्याय

बहुत पुरानी बात है। उस समय देवर्षि नारद जी पृथ्वी पर भ्रमण करने आते हैं। यहां कलियुग के प्रभाव से लोग दुखी नजर आते हैं जिससे वह व्यथित हो जाते हैं। वह वैकुण्ठ जाकर भगवान विष्णु से पूछते हैं - हे प्रभु! ऐसा व्रत बताइए जिससे प्राणी सभी दुखों से मुक्त हो जाए।

इस पर भगवान विष्णु ने उनको सत्यनारायण व्रत के बारे में बताया। श्री हरि ने बताया, "हे नारद! सत्यनारायण व्रत एक उत्तम व्रत है। इसे करने से सभी दुख, दरिद्रता, रोग और संकट दूर होते हैं। इस व्रत में सत्यनारायण रूप में मेरा पूजन किया जाता है। इस व्रत की कथा पूर्ण श्रद्धा से सुनने और प्रसाद लेने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

श्री सत्यनारायण व्रत कथा द्वितीय अध्याय

भगवान ने बताया कि एक समय एक निर्धन ब्राह्मण काशी में भिक्षा मांगकर जीवन यापन करता था। एक दिन वह बहुत दुखी होकर गंगा किनारे बैठा था। वहीं भगवान सत्यनारायण उसके सामने एक वृद्ध ब्राह्मण के रूप में प्रकट हुए और उसकी चिंता का कारण पूछा।

इस पर ब्राह्मण ने उनको अपना दुख बताया। भगवान बोले – तू सत्यनारायण व्रत करे, तेरा सब दुख दूर हो जाएगा। ब्राह्मण ने व्रत किया, कथा सुनी, प्रसाद बांटा और शीघ्र ही धन-धान्य से सम्पन्न हो गया।

श्री सत्यनारायण व्रत कथा तृतीय अध्याय

एक समय वह ब्राह्मण व्रत कर रहा था, उसी समय एक लकड़हारा वहां से गुजरा। उसने पूछा – हे ब्राह्मण! आप क्या कर रहे हैं? ब्राह्मण ने सत्यनारायण व्रत की जानकारी दी तो यह जानकर लकड़हारा भी श्रद्धा से व्रत करने लगा। थोड़े ही समय में वह बहुत समृद्ध हो गया। उसी नगर में एक धनी वैश्य भी था। उसने और उसकी पत्नी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से यह व्रत किया। कुछ समय बाद उन्हें एक सुंदर कन्या हुई जिसका नाम कलावती रखा गया।

श्री सत्यनारायण व्रत कथा चतुर्थ अध्याय

जब कलावती विवाह योग्य हुई, तो उसका विवाह राजा चंद्रकेतु से हुआ। एक बार जब दामाद अपने ससुर के साथ व्यापार यात्रा पर गया, तो उन्होंने संकल्प लेने के बाद व्रत करना भूल गए। रास्ते में संकट आया। राजा का सारा माल लुट गया, नाव डूब गई और उन्हें बंदी बना लिया गया।

उधर, घर पर उनकी पत्नी लीलावती और पुत्री कलावती ने फिर से श्रद्धा से सत्यनारायण व्रत किया। प्रभु प्रसन्न हुए और राजा को रिहा कर दिया। घर लौटकर राजा और उसके परिवार ने विधिपूर्वक व्रत किया और उन्हें स्थायी सुख-संपत्ति प्राप्त हुई।

श्री सत्यनारायण व्रत कथा पंचम अध्याय

एक बार राजा तुंगध्वज ने सत्यनारायण व्रत कथा होते देखी। परंतु उसमें शामिल होने की जगह उन्होंने अहंकारवश इसका अपमान कर दिया। फलस्वरूप उनके राज्य में भयंकर अकाल पड़ा। खेती सूख गई, पशु भी मरने लगे और परिवार खत्म होने लगे।

इसके बाद राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने विधिपूर्वक व्रत किया और सत्यनारायण भगवान से क्षमा मांगी। भगवान ने उन्हें क्षमा कर दिया और फिर से राज्य में सुख-शांति और समृद्धि लौट आई।

भगवान सत्यनारायण की आरती

भगवान सत्यनारायण की आरती

भगवान श्री सत्यनारायण की आरती

ओम जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।

सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥

ओम जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा॥

रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे।

नारद करत निराजन, घंटा ध्वनि बाजे॥

ओम जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा॥

प्रगट भये कलि कारण, द्विज को दरस दियो।

बूढो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥

ओम जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा॥

दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी।

चन्द्रचूड़ एक राजा, जिनकी विपत्ति हरी॥

ओम जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा॥

सत्यनारायण व्रत कथा के सभी पांच अध्याय पूर्ण करने के बाद आरती की जाती है। इसके बाद भगवान को भोग अर्पण कर प्रसाद वितरण किया जाता है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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