अध्यात्म

Puja Path Ke Niyam: दाएं या बाएं, पूजा-पाठ में पत्नी को पति के किस ओर बैठना चाहिए? भूलकर भी न करें ये चूक

भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ के कुछ नियम एकदम साफ हैं, जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए। आज हम आपको बताएंगे कि पूजा में पत्नी को पति के किस ओर बैठना चाहिए? आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

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पूजा में पत्नी को पति के किस ओर बैठना चाहिए?

Puja Path Ke Niyam: भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी को एक दूसरे का पूरक माना गया है। खासकर जब बात पूजा-पाठ, यज्ञ या किसी धार्मिक अनुष्ठान की आती है, तो दोनों का साथ बैठना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विवाह के उपरांत किसी भी पूजा-पाठ का फल पति-पत्नी (pooja vidhi for couples) को साथ में बैठकर ही मिलता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि पूजा के दौरान पत्नी को पति के दाएं बैठना चाहिए या बाएं? यदि आप भी इस सवाल का जवाब चाहते हैं, तो आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और शास्त्रीय आधार।

पत्नी को अर्धांगिनी क्यों कहा जाता है?

शास्त्रों में पत्नी को ‘अर्धांगिनी’ कहा गया है, जिसका अर्थ है आधा शरीर। इसका मतलब यह है कि बिना पत्नी के शामिल हुए पति का कोई भी धार्मिक कार्य पूर्ण नहीं माना जाएगा। पूजा में दोनों का एक साथ बैठना यह दर्शाता है कि दोनों मिलकर एक संपूर्ण इकाई हैं और एक साथ किए गए कार्य का फल अधिक शुभ होता है।

पूजा करते समय पत्नी को पति के किस ओर बैठना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा-पाठ या किसी भी शुभ कार्य के दौरान पत्नी को पति के बाईं ओर बैठना चाहिए। इसे 'वामांग' कहा जाता है। ‘वाम’ का अर्थ होता है बाईं ओर और ‘अंग’ का अर्थ है शरीर का हिस्सा। पत्नी को पति का वामांग माना गया है, यानी वह उसका आधा हिस्सा होती है। यह स्थान प्रेम, सम्मान और समानता का प्रतीक है।

Puja Rituals

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यज्ञ और हवन में बैठने के नियम

अगर आप हवन, यज्ञ या किसी विशेष पूजा का आयोजन कर रहे हैं, तो पति-पत्नी के बैठने में यही नियम लागू होता है। पत्नी का स्थान पति के बाईं ओर ही होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में बैठने से ऊर्जा का संतुलन बना रहता है और सकारात्मकता बढ़ती है। इससे पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।

कब बदलता है बैठने का स्थान

हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में पत्नी को पति के दाईं ओर भी बैठाया जाता है। जैसे कि विवाह के कुछ संस्कारों में या कन्यादान के समय पत्नी का स्थान पति के दाईं ओर होता है। लेकिन सामान्य पूजा-पाठ, व्रत या दैनिक आराधना में पत्नी का स्थान हमेशा बाईं ओर ही श्रेष्ठ माना गया है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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