Premanand Ji Maharaj Darshan Time (15 April 2026): अगर आप 15 अप्रैल 2026, बुधवार को Premanand Ji Maharaj के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो यह जरूरी है कि आप समय, स्थान और नई व्यवस्था की सही जानकारी पहले से जान लें। वृंदावन में हर दिन हजारों श्रद्धालु महाराज जी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में सही टाइमिंग जानना आपकी यात्रा को आसान और सफल बना सकता है। यदि आप कल महाराज जी के दर्शन करना चाहते हैं, तो आगे जानें दर्शन का सही समय और स्थान।
प्रेमानंद जी महाराज की सुबह की दिनचर्या
महाराज जी के आश्रम श्री हित राधा केलि कुंज आश्रम में दिन की शुरुआत बेहद पवित्र माहौल में होती है। सुबह का समय आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है, जहां भजन, पाठ और सत्संग से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। इस दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, इसलिए समय से पहले यहां पहुंचना लाभदायक रहता है।
- 04:15 AM – 05:45 AM: दैनिक सत्संग और उपदेश
- 05:45 AM – 06:30 AM: मंगला आरती और वन विहार
- 06:30 AM – 08:00 AM: राधा सुधा निधि पाठ
- 07:00 AM – 08:00 AM: एकांतिक वार्तालाप (सीमित प्रवेश)
- 08:15 AM – 09:00 AM: श्रृंगार आरती
- 09:00 AM – 09:30 AM: राधा नाम संकीर्तन
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केलि कुंज आश्रम का शाम का शेड्यूल
शाम के समय भी आश्रम में भक्ति का वातावरण उतना ही गहरा होता है। दिनभर की भागदौड़ के बाद यहां पहुंचकर श्रद्धालु मानसिक शांति का अनुभव करते हैं। शाम के समय आश्रम में कुछ इस तरह से कार्यक्रम संचालित होते हैं।
- 04:00 PM – 04:15 PM: धूप आरती
- 04:15 PM – 05:15 PM: वाणी पाठ
- 05:15 PM – 05:45 PM: सत्संग एवं चर्चा
- 05:45 PM – 06:00 PM: संध्या आरती
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प्रेमानंद महाराज के दर्शन की नई व्यवस्था क्या है?
पहले जहां महाराज जी पारंपरिक वृंदावन परिक्रमा मार्ग पर चलते हुए भक्तों को दर्शन देते थे, वहीं अब व्यवस्था में बदलाव किया गया है। 15 अप्रैल 2026 को भी आप नई व्यवस्था के अनुसार ही महाराज जी के दर्शन कर पाएंगे। अब प्रेमानंद जी महाराज परिक्रमा मार्ग पर नहीं आते हैं, बल्कि वे सौरभि कुंड की ओर जाते हुए रास्ते में भक्तों को दर्शन देते हैं।
सौरभि कुंड जाने के लिए महाराज जी सुबह करीब 06:00 बजे आश्रम से निकलते हैं और 07:00 बजे तक वहां पहुंचते हैं। इस समय के बीच ही उनका दर्शन करना सबसे उत्तम माना जाता है। महाराज जी वाहन से केलि कुंज से निकलते हैं और सौरभि कुंड के पास कुछ दूरी पैदल चलते हैं। इसी दौरान श्रद्धालु कतार में खड़े होकर उनके दर्शन करते हैं। यह समय बेहद खास होता है, क्योंकि इसमें भक्तों को करीब से दर्शन का अवसर मिल सकता है।
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