अध्यात्म

vaishakh amavasya 2026: वैशाख अमावस्या कब है 2026 में, जानें 16 या 17 अप्रैल में से क्या है इस महीने की अमावस की सही डेट

vaishakh amavasya kab hai 2026 mein: वैशाख अमावस्या दान-स्नान और तर्पण के लिए विशेष स्थान रखती है। यहां देखें कि 16 या 17 में से अप्रैल 2026 अमवास किस तारीख की है।

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वैशाख अमावस्या 2026 में कब है

vaishakh amavasya kab hai 2026 mein: हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है, लेकिन वैशाख माह की अमावस्या को विशेष रूप से पुण्यदायी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर दिन कहा जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह दिन स्नान, दान, पितृ तर्पण और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

वैशाख अमावस्या कब है 2026

वैशाख अमावस्या तिथि 16 अप्रैल 2026 को रात 8:11 बजे प्रारंभ होकर 17 अप्रैल की शाम 5:21 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में किसी भी व्रत या धार्मिक अनुष्ठान का महत्व उदया तिथि यानी सूर्योदय के समय पड़ने वाली तिथि से तय किया जाता है। यही कारण है कि स्नान-दान और पितृ कर्म के लिए 17 अप्रैल का दिन सबसे उत्तम माना गया है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्य कई गुना फल देते हैं और व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

वैशाख अमावस्या पर पितृ तर्पण का महत्व

वैशाख अमावस्या को पितरों की तृप्ति का दिन माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार जिन पूर्वजों का विधिवत श्राद्ध या तर्पण नहीं हो पाता, उनके लिए अमावस्या तिथि अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। इस दिन जल, तिल और कुश से तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

मान्यता यह भी है कि पितरों की संतुष्टि से जीवन में बाधाएं कम होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

वैशाख अमावस्या पर स्नान और दान का महत्व

वैशाख मास स्वयं ही स्नान और दान का महीना माना जाता है। इसलिए इस अमावस्या पर पवित्र नदी, सरोवर या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना गया है। सूर्योदय के समय स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना और भगवान विष्णु का स्मरण करना विशेष फलदायी बताया गया है।

दान के रूप में जल से भरा घड़ा, छाता, वस्त्र, अनाज, गुड़, तिल, सत्तू या जरूरतमंदों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। गर्मी के मौसम में जलदान को सबसे बड़ा दान कहा गया है।

वैशाख अमावस्या यानी आत्मशुद्धि का दिन

अमावस्या केवल पितृ कर्म का ही दिन नहीं है, बल्कि आत्ममंथन और आध्यात्मिक साधना का भी अवसर है। कई लोग इस दिन मौन व्रत, ध्यान, जप और भगवान विष्णु या शिव की पूजा करते हैं। मान्यता है कि अमावस्या की रात मन और विचारों को शांत करने के लिए सबसे उपयुक्त होती है।

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस दिन क्रोध, नकारात्मक सोच और बुरे कर्मों से दूर रहकर सेवा और करुणा का भाव अपनाने से जीवन में मानसिक शांति आती है।

वैशाख अमावस्या पर क्या करें और क्या न करें

वैशाख अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में उठना, स्नान करना और दान देना शुभ माना जाता है। वहीं इस दिन विवाद, अपशब्द और तामसिक भोजन से बचने की सलाह दी जाती है। कई लोग इस दिन पीपल वृक्ष की पूजा कर दीपक भी जलाते हैं, जिसे पितरों की कृपा प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।

वैशाख अमावस्या यानी आस्था और परंपरा का संगम

वैशाख अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता की भावना को भी दर्शाती है। यह दिन हमें अपने पूर्वजों को स्मरण करने, प्रकृति के प्रति सम्मान जताने और जरूरतमंदों की सहायता करने की प्रेरणा देता है।

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Medha Chawla
मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

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