Aaj Chand Kab Dikhega 15 July 2026: आज 15 जुलाई 2026, शुक्ल पक्ष द्वितीया बुधवार को आषाढ़ अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा के दर्शन होंगे। दिल्ली में चंद्र दर्शन का समय शाम 7:20 बजे से रात 8:18 बजे के बीच रहेगा। कोलकाता में चांद दिल्ली से करीब एक घंटा पहले दिखाई दे सकता है। जानें अपने शहर के अनुसार चंद्र दर्शन का सही समय और इसका धार्मिक महत्व।
आज चांद कब दिखेगा 15 जुलाई 2026
आषाढ़ अमावस्या के अगले दिन आज, बुधवार 15 जुलाई 2026 शुक्ल पक्ष द्वितीया को चंद्र दर्शन किए जाएंगे। अमावस्या के बाद पश्चिमी आकाश में दिखाई देने वाले चंद्रमा के अत्यंत पतले और चमकीले हिस्से को बालचंद्र या वर्धमान चंद्र कहा जाता है। यही नए चंद्र मास में चंद्रमा का पहला दृश्य स्वरूप होता है।
दृक पंचांग में दिल्ली के लिए आज चंद्र दर्शन का समय शाम 7:20 बजे से रात 8:18 बजे तक बताया गया है। इस प्रकार दिल्ली में चंद्र दर्शन के लिए करीब 58 मिनट की अवधि उपलब्ध रहेगी। पंचांग के अलग-अलग गणना प्रारूपों में समय में एक-दो मिनट का अंतर दिखाई दे सकता है।
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दिल्ली में आज 15 जुलाई 2026 को चांद कितने बजे दिखेगा
नई दिल्ली में बुधवार को सूर्यास्त लगभग शाम 7:20 बजे होगा। सूर्यास्त के बाद पश्चिम से उत्तर-पश्चिम दिशा में पतला चांद दिखाई दे सकता है। चंद्रमा लगभग रात 8:18 से 8:19 बजे क्षितिज के नीचे चला जाएगा।
इस आधार पर दिल्ली में चंद्र दर्शन का प्रमुख समय इस प्रकार है:
- चंद्र दर्शन प्रारंभ: शाम 7:20 बजे
- चंद्र दर्शन समाप्त: रात 8:18 बजे
- कुल अवधि: लगभग 58 मिनट
- चंद्रमा देखने की दिशा: पश्चिम से उत्तर-पश्चिम
चांद क्षितिज के बहुत पास और काफी पतला होगा। इसलिए ऊंची इमारतों, पेड़ों या धुंध से मुक्त स्थान से देखने पर इसके दिखाई देने की संभावना बेहतर रहेगी। दिल्ली में 15 जुलाई को सूर्यास्त का खगोलीय समय शाम 7:20 बजे दर्ज है।
कोलकाता में आज 15 जुलाई 2026 को चांद कितने बजे दिखेगा
कोलकाता में दिल्ली की तुलना में सूर्यास्त पहले होता है। बुधवार, 15 जुलाई को कोलकाता में सूर्यास्त लगभग शाम 6:24 बजे और चंद्रास्त करीब शाम 7:25 बजे होगा। इसलिए यहां चंद्र दर्शन की संभावित अवधि लगभग एक घंटे की रहेगी।
- कोलकाता में चंद्र दर्शन प्रारंभ: शाम 6:24 बजे के बाद
- चंद्र दर्शन समाप्त: शाम 7:25 बजे के आसपास
- कुल संभावित अवधि: लगभग 1 घंटा
- चंद्रमा देखने की दिशा: पश्चिम से उत्तर-पश्चिम
कोलकाता में चंद्रमा का प्रकाशित हिस्सा लगभग 1.7 प्रतिशत रहेगा। इसलिए चांद बहुत बारीक रेखा जैसा नजर आ सकता है। साफ क्षितिज और बादल रहित आकाश होने पर सूर्यास्त के कुछ समय बाद इसके दर्शन किए जा सकते हैं।
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दिल्ली और कोलकाता में चंद्र दर्शन का समय
| शहर | सूर्यास्त | चंद्रास्त | चंद्र दर्शन की संभावित अवधि |
|---|---|---|---|
| नई दिल्ली | शाम 7:20 बजे | रात 8:18–8:19 बजे | लगभग 58 मिनट |
| कोलकाता | शाम 6:24 बजे | शाम 7:25 बजे | लगभग 1 घंटा |
चंद्र दर्शन का समय स्थान के अक्षांश और देशांतर के अनुसार बदलता है। इसलिए दिल्ली का समय पूरे भारत पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। पूर्वी भारत के शहरों में सूर्यास्त और चंद्र दर्शन दिल्ली से पहले होंगे।
द्वितीया तिथि होने पर भी आज चंद्र दर्शन क्यों
द्रिक पंचांग के अनुसार बुधवार को शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पूर्वाह्न लगभग 11:50 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इसके बावजूद चंद्र दर्शन आज ही होंगे, क्योंकि यह अमावस्या के बाद आने वाली पहली संध्या है, जब नया चांद सूर्यास्त के बाद आकाश में दिखाई देने की स्थिति में होगा।
चंद्र दर्शन केवल सूर्यास्त के समय चल रही तिथि के नाम पर निर्धारित नहीं होता। इसका मुख्य आधार अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा का दिखाई देना है। यही कारण है कि शाम तक द्वितीया तिथि लग जाने के बावजूद 15 जुलाई को ही चंद्र दर्शन माने जाएंगे।
आज 15 जुलाई 2026 को चंद्रमा किस राशि में है
ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज ने बताया कि 15 जुलाई को चंद्रमा कर्क राशि में संचार करेगा। दिन के दौरान चंद्रमा आश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। दिल्ली आधारित गणना के अनुसार चंद्रमा रात लगभग 9:46 बजे आश्लेषा से मघा नक्षत्र में प्रवेश करेगा। यानी चंद्र दर्शन के समय चंद्रमा आश्लेषा नक्षत्र में ही रहेगा।
चंद्र दर्शन का धार्मिक महत्व
इस दिन चंद्रमा से अमृत का स्राव होता है, भगवान शिवजी ने शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन ही चंद्रमा को ही मस्तक पर धारण किया था. और तभी से भगवान शंकर ने चन्द्रमा को वरदान दिया था, जो भी व्यक्ति शुक्ल पक्ष द्वितीया के चन्द्रमा का दर्शन करेगा उसे मेरी कृपा प्राप्त होगी। चन्द्रमा का दर्शन करते हुए भगवान भोलेनाथ की स्तुति, मंत्र आदि का जाप करना विशषे फल प्रदान करता हैहिंदू परंपरा में अमावस्या के बाद पहली बार दिखाई देने वाले चंद्रमा का दर्शन शुभ माना जाता है। इसे नए चंद्र मास की वृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। कुछ श्रद्धालु चंद्र दर्शन के दिन उपवास रखते हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलते हैं।
सुजीत महाराज ने बताया कि चंद्र दर्शन करते समय यह धार्मिक परंपरा है कि जल में दूध, सफेद फूल या अक्षत मिलाकर अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद चंद्र देव का स्मरण कर सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है।
आज 15 जुलाई 2026 का चांद किस दिशा में देखें
आज का चांद सूर्यास्त के बाद पश्चिमी से उत्तर-पश्चिमी क्षितिज के पास दिखाई देगा। चंद्रमा बहुत पतला होने के कारण सीधे सिर के ऊपर तलाशने के बजाय उस स्थान के आसपास देखें, जहां सूर्य अस्त हुआ हो।
चंद्र दर्शन के लिए खुली छत, मैदान या ऐसा स्थान चुनें, जहां पश्चिम दिशा में ऊंची इमारतें और पेड़ न हों। आंखों को सूर्यास्त के बाद बदलती रोशनी के अनुकूल होने के लिए कुछ समय दें। बारिश, घने बादल या धुंध होने पर निर्धारित समय के बावजूद चांद दिखाई नहीं दे सकता।
डिस्क्लेमर: धार्मिक समय स्थान आधारित पंचांग गणना पर निर्भर करते हैं। अलग-अलग शहरों और पंचांग पद्धतियों में एक-दो मिनट का अंतर संभव है। मौसम और स्थानीय दृश्यता भी वास्तविक चंद्र दर्शन को प्रभावित कर सकती है।
