अध्यात्म

रवि प्रदोष व्रत का पारण कैसे करें, जानिए प्रदोष व्रत पारण विधि और समय

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  • Updated Mar 2, 2026, 07:51 AM IST

Ravi Pradosh Vrat Paran: बीते 1 मार्च को रवि प्रदोष व्रत रखा गया था। वहीं, आज फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। इस कारण आज के दिन प्रदोष व्रत का पारण किया जाएगा। रविवार का पड़ने वाला प्रदोष व्रत बेहद ही खास होता है। इस कारण प्रदोष व्रत का पारण विधि-विधान से किया जाना चाहिए। आइए जानते हैं कि प्रदोष व्रत की पारण विधि और समय क्या है?

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प्रदोष व्रत का पारण कैसे करें?

Ravi Pradosh Vrat Paran: बीते 1 मार्च को रवि प्रदोष व्रत रखा गया था। चूंकि यह व्रत रविवार के दिन पड़ा, इसलिए इसे रवि प्रदोष या भानु प्रदोष व्रत कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से भगवान शिव के साथ-साथ सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे जीवन में सुख, शांति, यश, सम्मान और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है तथा सूर्य ग्रह भी मजबूत होता है।

आज 2 मार्च, सोमवार को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि होने के कारण इस व्रत का पारण किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार व्रत का पारण सही समय और विधि से करना अत्यंत आवश्यक माना गया है, तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

2 मार्च को पारण का शुभ समय

पारण के लिए 2 मार्च को दो शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।

  • पहला शुभ समय: सुबह 6:12 बजे से 7:38 बजे तक
  • दूसरा शुभ समय: सुबह 9:07 बजे से 10:34 बजे तक
यदि संभव हो तो पहले मुहूर्त में पारण करना अधिक उत्तम माना जाता है। यदि किसी कारणवश उस समय पारण न हो पाए, तो दूसरे शुभ समय में भी विधिपूर्वक पारण किया जा सकता है। ध्यान रखें कि पारण हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए, इससे व्रत का संपूर्ण आध्यात्मिक लाभ मिलता है।

प्रदोष व्रत का पारण कैसे करें?

प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन प्रातःकाल किया जाता है। पारण के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सबसे पहले भगवान शिव का स्मरण करें। यदि संभव हो तो शिव मंदिर जाकर भगवान शिव के दर्शन करें। मंदिर में जाकर विधिपूर्वक आरती करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

पारण के दिन कुश के आसन पर बैठकर भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराना शुभ होता है। अभिषेक के लिए जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र का प्रयोग किया जा सकता है। ध्यान रखें कि पारण के समय तुलसी दल का उपयोग नहीं किया जाता है, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय मानी जाती है और शिव पूजन में इसका प्रयोग वर्जित है।

रुद्राभिषेक के पश्चात हवन करना भी उत्तम माना गया है। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करते हुए आहुति दें। इसके बाद भगवान शिव की भव्य आरती करें और उनसे परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

शास्त्रों के अनुसार पारण के दिन अन्न और वस्त्र का दान करना विशेष फलदायी माना गया है। जरूरतमंदों को भोजन कराना या अनाज दान करना पुण्यदायक होता है। इसके साथ ही वस्त्र दान करने से पापों का क्षय होता है और पुण्य की वृद्धि होती है।

कुछ परंपराओं में कहा गया है कि यदि कोई साधक लगातार 11 या 26 प्रदोष व्रत रखता है, तो अंतिम त्रयोदशी के दिन विशेष पूजन के साथ पारण किया जाता है। हालांकि सामान्य स्थिति में हर प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन चतुर्दशी या नियत तिथि में ही किया जाता है।

पारण के दिन सत्य बोलने, संयम रखने और क्रोध से दूर रहने का विशेष महत्व बताया गया है। कई भक्त रात्रि में जागरण कर शिव भजन-कीर्तन भी करते हैं, जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है और मन में शांति का संचार होता है।

क्यों खास है रवि प्रदोष व्रत? (Ravi pardosh Vrat Ke labh)

जब प्रदोष व्रत रविवार को पड़ता है तो इसे रवि प्रदोष या भानु प्रदोष कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान शिव के साथ सूर्य देव की भी कृपा प्राप्त होती है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार इससे सूर्य ग्रह मजबूत होता है, जिससे आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक सम्मान में वृद्धि होती है।

यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो या जो मान-सम्मान और करियर में उन्नति की कामना रखते हों।

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