Panchak In July 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार 4 जुलाई 2026, शनिवार से मृत्यु पंचक शुरू हो चुका है। पंचक को ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व दिया गया है और इसे कुछ कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता है कि पंचक के दौरान बिना विचार किए कोई भी मांगलिक या बड़ा कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। इस बार पंचक की शुरुआत शनिवार से होने के कारण इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। यह पंचक 4 जुलाई से शुरू होकर 8 जुलाई 2026 तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में मृत्यु पंचक को डर का नहीं, बल्कि सावधानी का समय माना गया है। इस दौरान व्यक्ति को सोच-समझकर निर्णय लेने चाहिए और शुभ कार्यों को टाल देना चाहिए।
क्या होता है मृत्यु पंचक
पंचक पांच दिनों की एक विशेष अवधि होती है। जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में भ्रमण करता है, तब पंचक लगता है। इस बार पंचक की शुरुआत शनिवार से हुई है, इसलिए इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सप्ताह के जिस दिन पंचक शुरू होता है, उसी के आधार पर उसका नाम रखा जाता है। शनिवार से शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
मृत्यु पंचक में रहता है ये खतरा
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान दुर्घटना, चोट, विवाद, मानसिक तनाव या अनचाही परेशानियों की आशंका बढ़ सकती है। इस कारण इस समय वाहन चलाते समय सावधानी बरतने, ऊंचाई पर काम करने से बचने और जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि इन बातों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, बल्कि ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
पंचक क्यों लगता है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा सबसे तेज गति से राशि और नक्षत्र परिवर्तन करता है। जब चंद्रमा अपनी यात्रा के दौरान धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में रहता है, तब पंचक का निर्माण होता है। यही कारण है कि पंचक वर्ष में कई बार आता है और हर बार उसके शुरू होने वाले वार के अनुसार उसका नाम बदल जाता है।
मृत्यु पंचक के दौरान क्या न करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना, भूमि पूजन और अन्य मांगलिक कार्यों को टालना चाहिए। यदि कोई शुभ कार्य बहुत जरूरी हो तो पहले किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से सलाह लेकर ही उसे करना उचित माना जाता है।
इस दौरान घर की छत डालने, भवन निर्माण शुरू करने और लकड़ी या ईंधन का संग्रह करने से भी बचने की परंपरा है। पंचक में चारपाई बनवाना, खरीदना, जोड़ना या खोलना भी शुभ नहीं माना जाता। दक्षिण दिशा की यात्रा करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा टालना संभव न हो तो भगवान का स्मरण करके और आवश्यक धार्मिक उपाय करके यात्रा करने की मान्यता है।
मृत्यु पंचक के दौरान क्या करें
मृत्यु पंचक के दौरान भगवान शिव, भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा करना शुभ माना जाता है। महामृत्युंजय मंत्र, हनुमान चालीसा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है। इस अवधि में दान-पुण्य करना, जरूरतमंद लोगों की सहायता करना, गौ सेवा करना और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना भी शुभ माना गया है। पंचक के दौरान मन को शांत रखना, क्रोध से बचना और संयमित जीवन जीना धार्मिक दृष्टि से लाभकारी माना जाता है।
पंचक में कौन से कार्य किए जा सकते हैं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के सभी दिन समान नहीं माने जाते। जब चंद्रमा धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र में रहता है, तब कुछ शुभ कार्य किए जा सकते हैं। वहीं, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में वाहन खरीदना शुभ माना जाता है। रेवती नक्षत्र के दौरान नए कपड़े, आभूषण खरीदना और कुछ परिस्थितियों में नया व्यापार शुरू करना भी शुभ माना गया है। हालांकि, किसी भी बड़े कार्य से पहले शुभ मुहूर्त का विचार करना आवश्यक माना जाता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
