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Navratri 2023 3rd Day Maa Chandraghanta Katha, Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन की देवी हैं मां चंद्रघंटा, जानें इनकी पूजा विधि, व्रत कथा, आरती, मंत्र और भोग

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Mar 24, 2023, 05:38 AM IST

Navratri 2023 3rd Day Maa Chandraghanta Puja Vidhi, Mantra, Aarti: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा को साहस और वीरता का प्रतीक माना जाता है। जानिए नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा विधि, व्रत कथा, आरती, मंत्र और भोग।

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Navratri 2023 Day 3: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा विधि, कथा, आरती और मंत्र यहां जानें

Navratri 2023 3rd Day Maa Chandraghanta Puja Vidhi and Mantra: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। इस बार 24 मार्च 2023 को चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है। मां चंद्रघंटा को देवी पार्वती का रौद्र रूप माना जाता है। देवी दुर्गा का ये स्वरूप साहस और वीरता का प्रतीक होता है। सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा असुरों का संहार करती हैं। ऐसी मान्यता है कि मां की आराधना करने से ग्रहों के अशुभ प्रभावों से छुटकारा मिलता है। आइए माता की पूजा विधि, मंत्र, आरती और व्रत कथा जानते हैं।

मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का चंद्रमा सुशोभित है डिस वजह से इन देवी का नाम चंद्रघंटा पड़ा। कहते हैं मां की उपासना करने से व्यक्ति के जीवन से भय, असफलता आदि का अंत हो जाता है।

मां चंद्रघंटा की कथा (Maa Chandraghanta Katha):

शास्त्रों के मुताबिक प्राचीन काल में जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध चल रहा था तब महिषासुर असुरों की तरफ से लड़ रहा था। वहीं, देवताओं की तरफ से भगवान इंद्र लड़ रहे थे। इस युद्ध में महिषासुर ने भगवान इंद्र को पराजित कर दिया था। महिषासुर का साम्राज्य देवलोक में हो गया और वह अत्याचार करने लगा। इस अत्याचार से परेशान होकर त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव भी क्रोधित हो गए। त्रिदेव और अन्य सभी देवताओं ने अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल किया तो मां भगवती का अवतरण हुआ। मां भगवती के अवतरण के बाद शिव जी ने अपना त्रिशूल मां भगवती को दे दिया। इसके अलावा भगवान विष्णु जी ने अपना चक्र मां भगवती को दिया। फिर सभी देवतागण ने भी अपने अस्त्र-शस्त्र मां भगवती को दे दिए। इंद्रदेव ने वज्र एवं ऐरावत हाथी दिया तो सूर्यदेव में उन्हें तेज, तलवार और सवारी के लिए शेर भेंट किया। इसके बाद देवी चंद्रघंटा ने महिषासुर का वध किया था।

मां चंद्रघण्टा की आरती (Maa Chandraghanta ki Aarti)

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।

पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।

चंद्र समान तुम शीतल दाती।

चंद्र तेज किरणों में समाती।

क्रोध को शांत करने वाली।

मीठे बोल सिखाने वाली।

मन की मालक मन भाती हो।

चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।

सुंदर भाव को लाने वाली।

हर संकट मे बचाने वाली।

हर बुधवार जो तुझे ध्याये।

श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।

सन्मुख घी की ज्योति जलाएं।

शीश झुका कहे मन की बाता।

पूर्ण आस करो जगदाता।

कांचीपुर स्थान तुम्हारा।

करनाटिका में मान तुम्हारा।

नाम तेरा रटूं महारानी।

भक्त की रक्षा करो भवानी।

मां चंद्रघण्टा मंत्र (Maa Chandraghanta Mantra)

  • ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

प्रार्थना मंत्र-

पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

स्तुति मंत्र-

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान मंत्र-

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

सिंहारूढा चन्द्रघण्टा यशस्विनीम्॥

मणिपुर स्थिताम् तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।

खङ्ग, गदा, त्रिशूल, चापशर, पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥

पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।

मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥

प्रफुल्ल वन्दना बिबाधारा कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।

कमनीयां लावण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

मां चंद्रघंटा का भोग (Maa Chandraghanta Bhog)

नवरात्रि के तीसरे दिन माता को दूध से बनी हुई कोई भी मिठाई या फिर खीर का भोग लगाएं और फिर पूजा के बाद ब्राह्मण को दान अवश्य करें। कहते हैं ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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