Mithun Sankranti 2026: सनातन परंपरा में सूर्य देव के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है और इसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। जून 2026 में सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मिथुन संक्रांति कहा जाता है। यह दिन सूर्य उपासना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मान-सम्मान और सफलता प्राप्त होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को आत्मबल, स्वास्थ्य और करियर का कारक ग्रह माना गया है। इसलिए मिथुन संक्रांति पर सूर्य अर्घ्य और मंत्र जाप करने से आरोग्यता और कार्यक्षेत्र में लाभ मिलता है। किस तारीख को होगा सूर्य का राशि परिर्वतन (June 2026 Sankranti Date) जानें जून में कब है संक्रांति।
जून 2026 में संक्रांति कब है
मिथुन संक्रांति 2026 के अवसर पर सूर्य देव 15 जून 2026 को वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सूर्य का यह गोचर बुद्धि, संवाद क्षमता और नई ऊर्जा को बढ़ाने वाला माना जाता है। इस दौरान शिक्षा, करियर और सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
मिथुन संक्रांति 2026 के शुभ मुहूर्त और खास योग
मिथुन संक्रांति इस बार बेहद शुभ योग के साथ आएगी। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार 15 जून 2026 को दोपहर 12:58 बजे सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी क्षण से पुण्य कार्यों और सूर्य उपासना का विशेष महत्व शुरू हो जाएगा।
- दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पुण्य काल दोपहर 12:59 बजे से शाम 07:20 बजे तक रहेगा।
- जबकि महा पुण्य काल दोपहर 12:59 बजे से 03:19 बजे तक माना गया है।
- इस दिन शाम 07:08 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग प्रभावी रहेंगे।
- इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त का विशेष संयोग भी इस दिन को और पवित्र बना रहा है।
मिथुन संक्रांति पर सूर्य उपासना के उपाय
- संक्रांति के दिन सुबह स्नान का विशेष महत्व माना गया है। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
- इसके अलावा घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना जाता है।
- तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प और अक्षत डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें। मान्यता है कि इससे आत्मबल, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
- इस दिन अनाज, वस्त्र, छाता, मिट्टी का घड़ा और ठंडी वस्तुओं का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
- मिथुन संक्रांति पर ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप और ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मान्यता है कि इस दौरान किया गया दान, जप और सूर्य अर्घ्य कई गुना शुभ फल प्रदान करता है। खास बात यह है कि इस बार मिथुन संक्रांति कई दुर्लभ शुभ योगों के साथ आ रही है, जो साधना और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत लाभकारी माने जा रहे हैं। मान्यता है कि अभिजीत मुहूर्त में की गई सूर्य उपासना, दान और मंत्र जाप से साधक को कई गुना शुभ फल प्राप्त होता है।
