अध्यात्म

भगवान शिव के थे 8 पुत्र और 8 पुत्रियां, कितनों का नाम जानते हैं आप?

Lord Shiva Faimly: देवों के देव महादेव के पुत्र कार्तिकेय और भगवान गणेश का नाम तो आपने खूब सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके 2 नहीं 8 पुत्र थे। यही नहीं उनकी 8 पुत्रियां भी थीं। अगर नहीं तो आइए जानते हैं भगवान शिव के परिवार के बारे में, जानिए उनके कितने पुत्र और पुत्रियां थीं और उनके क्या नाम थे?

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भगवान शिव के कितने पुत्र और पुत्रियां हैं

Lord Shiva Faimly: हिंदू पुराणों में भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। उनके गले में नाग, हाथों में डमरू और त्रिशूल रहता है। उनकी पत्नी मां पार्वती सती का दूसरा रूप हैं, जिन्होंने शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था। शिव-पार्वती का मिलन गृहस्थ जीवन की शुरुआत था, जिससे कई रोचक घटनाएं हुईं। पुराणों में शिव के 8 पुत्र और 8 पुत्रियों का जन्म वर्णित है, लेकिन इनकी कथाएं विरोधाभासी और रहस्यमयी हैं। वहीं, भगवान विष्णु के पुत्र आनंद, कर्दम, श्रीद और चिक्लीत हैं, लेकिन शिव की संतानें अलग-अलग तरीकों से जन्मीं हैं। सती के आत्मदाह के बाद पार्वती रूप में जन्म लेकर शिव से विवाह किया, तब संतानें हुईं। आइए जानते हैं इन 8 पुत्रों और 8 पुत्रियों के नाम, जन्म कथा क्या है।

भगवान शिव के थे 8 पुत्र

शिव-पार्वती की संतानें विभिन्न पुराणों जैसे शिव पुराण, स्कंद पुराण और भागवत में वर्णित हैं। इनकी उत्पत्ति सामान्य नहीं, बल्कि चमत्कारी है।

भगवान गणेश

भगवान गणेश को शिव का पहला पुत्र माना जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न में गणेश जी का जन्म हुआ था। एक कथा के अनुसार माता पार्वती ने चंदन के मिश्रण से उबटन किया और उससे भगवान गणेश को बनाया। इसके साथ ही उन्होंने अपने पुत्र गणेश को स्वयं के नहाने तक द्वार की देखभाल करने के लिए बैठाया।

इस दौरान जब भगवान शिव आए तो गणेश जी ने उनको अंदर जाने से रोक दिया। इस पर क्रोध में आकर भगवान शिव ने उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। इस पर माता पार्वती क्रोधित हो गईं। उनके क्रोध को शांत करने के लिए भगवान गणेश को हाथी का सिर लगाकर दोबारा जीवित किया गया। वहीं, दूसरी कथा में शनि दृष्टि से उनका सिर जल गया, तब हाथी सिर लगाया गया। भगवान गणेश विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य हैं।

कार्तिकेय

कार्तिकेय को स्कंद, सुब्रमण्यम या मुरुगन कहते हैं। इनका जन्म षष्ठी तिथि को हुआ। सती के आत्मदाह के बाद शिव तप में लीन हुए, तब तारकासुर का आतंक बढ़ा। देवताओं की प्रार्थना पर शिव-पार्वती का विवाह हुआ। कार्तिकेय का जन्म शिव तेज से हुआ, जिसे छह कृतिकाओं ने पाला। उन्होंने तारकासुर का वध किया। दक्षिण भारत में उनकी पूजा होती है, स्कंद पुराण उनके नाम पर है। उत्तर कुरु में स्कंद के रूप में उन्होंने शासन किया।

सुकेश

सुकेश अनाथ बालक था। राक्षस हेति की पत्नी भया से विद्युत्केश जन्मा, उसका विवाह सालकटंकटा से हुआ। सालकटंकटा व्यभिचारिणी थी, इस कारण उसने जन्मे पुत्र को छोड़ दिया। शिव-पार्वती ने अनाथ बालक को गोद लिया और सुकेश नाम दिया। सुकेश का विवाह गंधर्व कन्या देववती से हुआ, जिनसे माल्यवान, सुमाली और माली का जन्म हुआ। ये राक्षस कुल के आदि बने और माल्यवान ही रावण के नाना थे।

जलंधर

जलंधर शिव का चौथा पुत्र था, लेकिन यह उन्हीं का दुश्मन बन गया। भागवत पुराण के अनुसार शिव ने अपने तेज को समुद्र में फेंक दिया, जिससे जलंधर का जन्म हुआ। जलंधर का विवाह वृंदा से हुआ। वृंदा के पतिव्रत के चलते जलंधर अजेय हो गया था। जलंधर ने तीनों लोकों को जीत लिया। इसके बाद उसने माता पार्वती को पाने की कोशिश की। इस पर भगवान विष्णु ने जलंधर का वेष धारणकर वृंदा का सतीत्व भंग कर दिया। वृंदा का सतीत्व भंग होते ही भगवान शिव ने उसका वध कर दिया। वृंदा ने आत्मदाह कर लिया और तुलसी का पौधा बन गईं। पंजाब का जालंधर शहर उसी राक्षस के नाम पर है, वहां, वृंदा मंदिर भी है।

अयप्पा

अयप्पा के पिता शिव, माता विष्णु का मोहिनी रूप है। समुद्र मंथन में निकले अमृत को दैत्यों से बचाकर देवताओं को पिलाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप रखा था। उनका मोहिनी रूप देख भगवान शिव का वीर्यपात हो गया। उस वीर्यपात से अयप्पा का जन्म हुआ। केरल के शबरीमलई मंदिर में अयप्पा का पूजन किया जाता है। मकर संक्रांति पर आज भी ज्योति दिखती है। जिसके दर्शन को करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। इनको हरिहरपुत्र कहा जाता है।

भौम

भौम का जन्म शिव के ललाट से पसीने की तीन बूंदों से हुआ था, जो पृथ्वी पर गिरीं। इससे चार भुजाओं वाला रक्त वर्ण बालक जन्मा था। जिसे पृथ्वी ने पाला, इसलिए भौम यह बालक कहलाया। इस बालक ने बड़े होकर काशी में तप किया और भगवान शिव ने उन्हें मंगल लोक का राजा बना दिया। इसकी कारण भौम मंगल के देवता हैं।

इन दो पुत्रों का भी है वर्णन

एक बार माता पार्वती ने खेल-खेल में भगवान शिव की आंखें बंद कर दीं, जिससे सृष्टि में अंधेरा छा गया। इससे अंधक का जन्म हुआ। वहीं, पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव के एक और पुत्र खुजा थे, जो धरती से तेज किरणों की तरह निकले थे और आकाश में चले गए थे।

भगवान शिव की थीं ये 3 पुत्रियां

माता पार्वती ने अपना अकेलापन दूर करने के लिए कल्पवृक्ष से अशोक सुंदरी की उत्पत्ति की थी। वहीं, माता ज्योति (ज्वालामुखी) को भी भगवान शिव की पुत्री माना गया है। इसके साथ ही मनसा माता भी भगवान शिव की पुत्री हैं।

5 नागकन्याओं का भी है वर्णन

शिव की पुत्रियां सर्प रूप में जन्मी थीं। एक दिन शिव-पार्वती सरोवर में जल क्रीड़ा कर रहे थे, इस दौरान शिव का वीर्यस्खलन हुआ। माता पार्वती ने वीर्य पत्ते पर रखा, इससे पांच नाग कन्याओं ने जन्म लिया। पार्वती को इस बात का पता नहीं था। भगवान शिव रोज सरोवर में जाकर अपनी पुत्रियों के साथ खेलते थे। एक बार पार्वती को शक हुआ और उनके पीछे गईं तो क्रोधित होकर उन कन्याओं को मारने दौड़ीं। शिव ने उनको रोक दिया और कथा सुनाई। उन कन्याओं के नाम जया, विषहरा, शांभवी, देव और दौतली था। सावन में इनकी पूजा की जाती है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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