अध्यात्म

Makar Sankranti 2023: मकर संक्रांति पर आकाशीय उत्सव का नाम है पतंगबाजी, पढ़ें श्रीराम से है इसका क्या संबंध

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 10, 2023, 10:23 AM IST

Makar Sankranti 2023: त्रेता युग में नारायण के पुरुषाेत्तम अवतार भगवान श्रीराम ने अयोध्यावासियों के उल्लास के लिए उड़ायी थी पतंग। उड़ते हुए पंतग पहुंच गयी थी इंद्रलोक। इंद्र के पुत्र जयंत की पत्नी के पास पहुंची पतंग। भगवान ने स्वयं दर्शन देकर जयंत की पत्नी को कर दिया था धन्य। पतंग है उल्लास, स्वतंत्रता का प्रतीक। मकर संक्रांति के सूर्य प्रकाश में पतंग उड़ाने से शरीर को मिलती है स्फूर्ति।

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Makar Sankranti 2023: मकर संक्रांति पर आकाशीय उत्सव का नाम है पतंगबाजी, पढ़ें श्रीराम से है इसका क्या संबंध

KEY HIGHLIGHTS
  • त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने उड़ायी थी पतंग
  • इंद्र लोक में इंद्र की पुत्रवधू को दिए थे भगवान ने दर्शन
  • मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने से शरीर को मिलती है स्फूर्ति


Makar Sankranti 2023: दान, खिचड़ी के साथ मकर संक्रांति पर्व है पतंगबाजी का। उत्तर से लेकर दक्षिण तक, गुजरात से लेकर राजस्थान, महाराष्ट्र तक सभी जगह मकर संक्रांति के दिन आसमान में रंग बिरंगी पतंगें कलाबाजियां करती देखी जाती हैं। गुजरात और राजस्थान में तो इस दिन विशेष रूप से पतंग महोत्सव मनाया जाता है और बाकायदा पतंगबाजों के बीच प्रतियोगिता होती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि सनातन धर्म के अन्य त्योहार− पर्वों की भांति ही मकर संक्रांति पर पतंगबाजी करने का अपना अलग महत्व है।

जी हां, बहुत कम लोग जानते हैं कि मकर संक्रांति पर पतंगबाजी की डोर आज से नहीं अपितु त्रेता युग से जुड़ी हुयी है। इस उत्सव का संबंध सीधे रूप से भगवान नारायण के पुरुषोत्तम अवतार श्रीराम और रुद्र के अवतार हनुमान जी से जुड़ा है।

नील गगन में इतराती, इठलाती रंग बिरंगी पतंग अपने आप में स्वतंत्रता का प्रतीक है। इसे शुभता का प्रतीक कहना भी गलत न होगा। पतंग संदेश देती है कि सर्द ऋतु का आलस्य त्याग कर्म पथ पर उन्मुकता से बढ़ते रहो। मकर संक्रांति के सूर्य प्रकाश में पतंग उड़ाने से शरीर को मिलती है स्फूर्ति।

श्रीराम का पतंग महोत्सव से संबंध

मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा का आरंभ भगवान श्रीराम ने किया था। अयोध्यावासियों के लिए उल्लास और मंगल कामना करते हुए इस दिन उन्होंने जब पतंग उड़ायी तो वो उडते हुए इंद्र लोक में पहुंच गयी। जहां पतंग इंद्र के पुत्र जयंत को ये जाकर मिली। जयंत की पत्नी ने जब रंग बिरंगी पतंग को देखा तो वो हर्षित हो उठी। वो ये जानना चाहती थी ये किसने भेजी है।

उसे लगा कि पतंग को लेने के लिए इसे उड़ाने वाला अवश्य आएगा। श्री राम ने पतंग लेने की जिम्मेदारी पवन पुत्र हनुमान जी को दी। जब हनुमान जी पतंग लेने पहुंचे तो जयंत की पत्नी ने उनसे पूछा कि ये आपने ही उड़ायी थी। तब हनुमान जी ने अपने प्रभु का विवरण उनके समक्ष किया। जयंत की पत्नी ने हनुमान जी से आग्रह किया प्रभु दर्शन का। तब हनुमान जी की प्रार्थना में इंद्रलोक में प्रभु श्रीराम ने जयंती की पत्नी को दर्शन देकर धन्य किया। तभी से पतंगबाजी की परंपरा चली आ रही है। हर कोइ इस प्रयास में रहता है कि उसकी पतंग अंतरिक्ष की अनंत गहराइ में पहुंच जाए।

डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।

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