अगर आप एक व्यापारी, उद्यमी या पेशेवर (Professional) हैं और अपने व्यवसाय के दैनिक वित्तीय लेनदेन को संभालने के लिए करंट अकाउंट (Current Account) यानी चालू खाते का उपयोग करते हैं, तो आपके लिए नकद लेनदेन से जुड़े बैंकिंग और आयकर नियमों को समझना बेहद जरूरी है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि करंट अकाउंट से एक साल में कितना कैश निकाला या जमा किया जा सकता है और क्या ऐसा करने पर इनकम टैक्स विभाग की नजर आप पर पड़ती है? आइए जानते हैं Current Account से आप एक साल में कितना ट्रांजेक्शन कर सकते हैं।
क्या करंट अकाउंट में कैश ट्रांजैक्शन की कोई कानूनी सीमा है?
पहले यह साफ करना जरूरी है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या आयकर विभाग की तरफ से करंट अकाउंट में एक वित्तीय वर्ष के भीतर नकद जमा (Cash Deposit) करने या नकद निकासी (Cash Withdrawal) करने की कोई अधिकतम कानूनी सीमा (Maximum Legal Limit) तय नहीं की गई है। इसका मतलब यह है कि आप अपने व्यवसाय की टर्नओवर और जरूरतों के अनुसार जितना चाहें उतना नकद लेनदेन कर सकते हैं। चालू खाते को बनाया ही इसी उद्देश्य के लिए गया है ताकि बिना किसी बाधा के बड़े व्यावसायिक लेनदेन किए जा सकें। हालांकि, असीमित लेनदेन की इस छूट का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यह पूरी तरह टैक्स-फ्री है या इस पर सरकार की निगरानी नहीं होती।
1 करोड़ रुपए के लिए क्या है नियम
भले ही नकद निकासी पर कोई ऊपरी सीमा न हो, लेकिन काले धन पर लगाम लगाने और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए आयकर अधिनियम (Income Tax Act) की धारा 194N के तहत एक कड़ा नियम बनाया गया है।
अगर कोई खाताधारक अपने करंट अकाउंट से एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपये से अधिक की नकद निकासी करता है, तो 1 करोड़ रुपये से ऊपर की जितनी भी राशि होगी, उस पर बैंक द्वारा सीधे 2% की दर से टीडीएस (TDS - Tax Deducted at Source) काट लिया जाएगा।
ऐसे समझें कितना टीडीएस लगेगा
मान लीजिए आपके बिजनेस खाते से पूरे साल में कुल ₹1.20 करोड़ कैश निकाला गया। ऐसी स्थिति में टीडीएस पूरे ₹1.20 करोड़ पर नहीं कटेगा। नियम के मुताबिक, 1 करोड़ की सीमा से ऊपर की राशि यानी केवल ₹20 लाख पर 2% की दर से ₹40,000 का टीडीएस काटा जाएगा।
ITR दाखिल न करने वालों के लिए नियम: यदि आपने पिछले 3 सालों से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो यह नियम आपके लिए और भी कड़ा हो जाता है। ऐसी स्थिति में, केवल 20 लाख रुपये से अधिक की नकद निकासी पर ही 2% का टीडीएस कटना शुरू हो जाता है, और यदि निकासी 1 करोड़ रुपये से ऊपर चली जाती है, तो टीडीएस की दर बढ़कर 5% हो जाती है।
क्या यह टीडीएस रिफंड हो सकता है? कई व्यापारियों को लगता है कि यह पैसा डूब जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह टीडीएस आपके द्वारा चुकाए गए एडवांस टैक्स की तरह काम करता है। जब आप अपना आईटीआर (ITR) फाइल करेंगे, तब आप इस कटे हुए टीडीएस को अपनी कुल टैक्स लायबिलिटी (Tax Liability) के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। अगर आपकी कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है, तो आप इसका पूरा रिफंड भी क्लेम कर सकते हैं।
बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले कैश हैंडलिंग चार्ज
कानूनी लिमिट न होने के बावजूद, सभी कमर्शियल बैंक अपने स्तर पर हर महीने या साल के लिए 'मुफ्त कैश लेनदेन' (Free Cash Limit) की एक सीमा जरूर निर्धारित करते हैं। यह सीमा आपके द्वारा चुने गए करंट अकाउंट के वेरिएंट (जैसे- सिल्वर, गोल्ड, प्लेटिनम) पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, बड़े सरकारी और निजी बैंकों में अकाउंट के वेरिएंट के हिसाब से हर महीने ₹2 लाख से ₹10 लाख तक की मुफ्त कैश लिमिट मिलती है।
एक बार जब आप अपने बैंक द्वारा दी गई मासिक मुफ्त नकद जमा या निकासी की सीमा को पार कर जाते हैं, तो बैंक हर अतिरिक्त लेनदेन पर 'कैश हैंडलिंग चार्ज' या सर्विस फीस वसूलना शुरू कर देते हैं। यह चार्ज आमतौर पर प्रति हजार रुपये पर कुछ रुपये (जैसे ₹3 से ₹5 प्रति ₹1000) या प्रति ट्रांजैक्शन एक निश्चित राशि (जैसे ₹100 से ₹150) हो सकता है। इसलिए, बिना सोचे बार-बार कैश का इस्तेमाल करने पर आपके बिजनेस का परिचालन खर्च काफी बढ़ सकता है।
आयकर विभाग की निगरानी और नोटिस का खतरा
करंट अकाउंट के हर बड़े ट्रांजैक्शन पर आयकर विभाग की पैनी नजर होती है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के नियमों के अनुसार, अगर किसी करंट अकाउंट में एक वित्तीय वर्ष के भीतर 50 लाख रुपये या उससे अधिक का कैश जमा किया जाता है या निकाला जाता है, तो बैंकों के लिए इसकी जानकारी अनिवार्य रूप से 'स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस' (SFT) के जरिए आयकर विभाग को देना आवश्यक होता है।
अगर आपके खाते में ऐसा कोई बड़ा ट्रांजैक्शन होता है जो आपके आईटीआर (ITR) में घोषित की गई सालाना कमाई या बिजनेस टर्नओवर से मेल नहीं खाता, तो आयकर विभाग आपको नोटिस भेजकर उस कैश के स्रोत (Source of Income) का हिसाब मांग सकता है। अगर आप उस नकद राशि का वैध स्रोत और व्यावसायिक बिल दिखाने में असमर्थ रहते हैं, तो आपको भारी जुर्माना और टैक्स देना पड़ सकता है।
