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कानपुर का गंगा मेला कब है 2026 में, नोट करें गंगा मेला 2026 की स्टार्ट एंड डेट, गंगा मेला कब से कब तक चलेगा

Kanpur Ganga Mela 2026: कानपुर का ऐतिहासिक हटिया होली मेला जिसे गंगा मेला भी कहा जाता है जल्दी शुरू होने जा रहा है। इस मेले में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी पूरे उत्साह के साथ शामिल होते हैं। आइए जानते हैं कब शुरू होगा कानपुर का गंगा मेला और कब तक चलेगा?

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कानपुर का गंगा मेला कब से होगा?

Kanpur Ganga Mela 2026: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर की पहचान सिर्फ उद्योग और व्यापार से ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं और उत्सवों से भी है। इन्हीं में से एक कानपुर का गंगा मेला भी फेमस है। जिसे शहर का सबसे खास और रंगों से भरा उत्सव माना जाता है। यह मेला होली के बाद आयोजित किया जाता है और कानपुर की पारंपरिक 'गंगा वाली होली' के नाम से प्रसिद्ध है। हर साल हजारों लोग इस मेले का हिस्सा बनने के लिए शहर के अलग-अलग इलाकों से पहुंचते हैं। आइए जानते हैं इस बार गंगा मेला कब से कब तक चलेगा?

कानपुर का गंगा मेला 2026 कब से है

साल 2026 में कानपुर का प्रसिद्ध गंगा मेला 10 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा। यह मेला होली के करीब एक सप्ताह बाद मनाया जाता है और शहर में होली उत्सव का समापन भी इसी दिन माना जाता है। इस दिन पूरा शहर रंगों में सराबोर नजर आता है और लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गंगा मेले की शुभकामनाएं देते हैं।

गंगा मेला 2026 कब से तक रहेगा

कानपुर के गंगा मेला मुख्य आयोजन आमतौर पर एक दिन का होता है, लेकिन इसकी तैयारियां और उत्सव का माहौल कई दिन पहले से ही शुरू हो जाता है। इस बार कानपुर का गंगा मेला 10 मार्च की सुबह से शुरू होगा और शाम तक विभिन्न कार्यक्रमों के साथ इसका समापन होगा।

कानपुर का गंगा मेला क्यों लगता है

कानपुर में गंगा मेला लगने के पीछे कारण की बात करें तो माना जाता है कि अंग्रेजी शासन के दौरान अंग्रेजों ने कानपुर में होली खेलने पर पाबंदी लगा दी थी। जिसके विरोध करते हुए कुछ नवयुवकों ने होली खेली तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जिसके विरोध में लोगों ने कहा कि जब तक युवकों को छोड़ा नहीं जाएगा तब तक रंग खेलना जारी रहेगा। जिसे आंदोलन का रूप लेते देख युवकों को कानपुर में गंगा के पास लाकर छोड़ दिया गया था। तभी से कानपुर में गंगा मेला का शुरुआत हुई।

कानपुर के गंगा मेले में क्या होता है

कानपुर का गंगा मेला सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान भी है। यहां लोग गंगा तट पर पहुंचकर मां गंगा के दर्शन करते हैं और उत्सव के साथ आस्था का भी अनुभव करते हैं। इस दिन लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं, रंग-गुलाल लगाते हैं और गंगा तट पर जाकर एक-दूसरे को बधाई देते हैं। इस मेले की शुरुआत रंगों और जुलूस से होती है और शाम तक कई अलग-अलग कार्यक्रमों के साथ इसका समापन हो जाता है।

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गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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