अध्यात्म

9 या 10 मार्च- शीतला सप्तमी कब है 2026 में, यहां से नोट करें तिथि, पूजा मुहूर्त और खाना बनाने का शुभ समय

Sheetala Saptami 2026 Date: होली के बाद चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस साल शीतला सप्तमी कब है, इसकी तिथि आप यहां से जान सकते हैं। साथ ही इस दिन कितने बजे खाना बनाना है, ये भी बताया गया है।

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शीतला सप्तमी 2026 डेट, पूजा मुहूर्त और खाना बनाने का समय (pc: pinterest)

Sheetala Saptami 2026 Date: हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शीतला सप्तमी का त्योहार मनाया जाता है। ये व्रत माता शीतला माता को समर्पित होता है। लोग सुबह स्नान करके माता शीतला की पूजा, कथा और प्रसाद अर्पित करते हैं। हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है इस दिन व्रत रखने से परिवार के सभी सदस्यों को गर्मी के मौसम के दौरान होने वाली बीमारियों जैसे चेचक, बुखार, फोड़े-फुंसी आदि से मुक्ति मिल जाती है। महिलाएं शीतला माता का व्रत बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं। इतना ही नहीं इस व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन भी माता शीतला की पूजा की जाती है और कई जगहों पर सप्तमी की रात को ही भोजन बनाकर रख लिया जाता है, जिसे अगले दिन अष्टमी (बसोड़ा) पर प्रसाद के रूप में खाया जाता है। यहां से आप शीतला सप्तमी की तिथि, पूजा मुहूर्त, खाना बनाने का समय आदि जान सकते हैं।

साल 2026 में शीतला सप्तमी कब है?

इस साल यानी साल 2026 में 10 मार्च, मंगलवार के दिन शीतला सप्तमी मनाई जाएगी।

शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त 2026-

शीतला सप्तमी के दिन पूजा का समय सुबह 6 बजकर 4 मिनट से शाम में 5 बजकर 56 मिनट है।

शीतला सप्तमी के दिन खाना बनाने का शुभ समय-

शीतला अष्टमी के दिन खास नियम होता है कि उसी दिन ताजा खाना नहीं बनाया जाता। इस व्रत में खाना एक दिन पहले यानी सप्तमी की रात या शाम को बनाकर रख लिया जाता है, जिसे अगले दिन ठंडा (बासी) प्रसाद के रूप में खाया जाता है। इसलिए खाना बनाने का शुभ समय सप्तमी के दिन दोपहर या शाम से लेकर रात तक माना जाता है, ताकि अगले दिन अष्टमी पर चूल्हा न जलाना पड़े। मान्यता है कि ऐसा करने से माता शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार को बीमारियों से रक्षा का आशीर्वाद देती हैं।

शीतला सप्तमी के भोग-

शीतला सप्तमी के दिन मां शीतला को खास मीठे चावलों का भोग चढ़ाया जाता है। ये चावल गुड़ या गन्ने के रस को मिलाकर बनाए जाते हैं। शीतला सप्तमी से एक रात पहले ही इस भोग को बनाकर रख लिया जाता है और फिर पूजा के बाद इसे ही इसे घर में सभी सदस्यों को खिलाया जाता है। बता दें कि इस दिन घर में सुबह के समय कुछ भी नहीं बनाया जाता है। जो लोग व्रत रहते हैं वो इन्हीं मीठे चावल को खाकर ही व्रत रखते हैं।

शीतला सप्तमी का महत्व-

हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी का महत्व बताते हुए कहा गया है कि इस व्रत को रखने से संतानों की सेहत अच्छी बनी रहती है। इस व्रत के प्रभाव से बुखार, आंखों से जुड़ी समस्याओं आदि से मुक्ति मिल जाती है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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