कल का पंचांग ज्योतिषियों के लिए पूरे दिन की दिशा निर्धारित करने वाला है। कल चतुर्थी तिथि, पुष्य नक्षत्र 11:33:37 तक एवं व्याघात 17:35:20 तक योग है। ये संयोजन आध्यात्मिक साधना, पूजन, व्रत आदि के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं। गुरूवार को शनि देव की पूजा का विशेष महत्व होता है।
सूर्य-चंद्र की स्थिति:
सूर्य की स्थिति – 05:23:06 से 19:21:05 तकचंद्रमा – कर्क राशि, चंद्रोदय – 08:39:00
चंद्रास्त – 22:32:00
संवत्सर:
शक – 1947, विक्रम – 2083, काली – 5127। मास - ज्येष्ठ (पूर्णिमांत) व ज्येष्ठ (अमांत), ऋतु – ग्रीष्म।
शुभ समय:
अभिजीत मुहूर्त – 11:54:09 से 12:50:01 तक
अशुभ मुहूर्त:
राहु काल व यमगण्ड काल में शुभ कार्य न करें।
राहु काल: 14:06:50 से 15:51:35 तक
यमगण्ड: 05:23:06 से 07:07:50 तक
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चंद्रबल व ताराबल:
वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ को चंद्रबल प्राप्त है। अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती जैसे नक्षत्र ताराबल से युक्त हैं।
