कल का पंचांग 15-05-2026: कल का दिन हिन्दू पंचांग के अनुसार विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व रखता है। कल कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो 08:34:06 तक, चतुर्दशी प्रभावी रहेगी। नक्षत्र अश्विनी है जो 20:15:36 तक रहेगा। करण क्रमशः वणिज 08:34:06 तक, विष्टि रहेगा। कल का योग आयुष्मान है, जो 14:20:36 तक प्रभावी रहेगा। कल का दिन शुक्रवार है।
कल सूर्य और चंद्र से जुड़ी गणनाएँ
कल का सूर्योदय प्रातः 05:30:37 पर और सूर्यास्त संध्या 19:04:33 पर होगा।कल का चंद्रमा मेष राशि में है और 17:34:59 तक वहीं रहेगा। चन्द्रोदय का समय 28:36:00 पर और चंद्रास्त 17:34:59 (अगले दिन भोर में) होगा। वर्तमान ऋतु ग्रीष्म है।
हिंदू मास एवं संवत्सर
आज शक संवत 1948 पराभव, विक्रम संवत 2083, तथा काली संवत 5127 चल रहा है। प्रविष्टे / गत्ते है। पूर्णिमांत ज्येष्ठ मास और अमांत वैशाख मास है। दिन काल 13:33:55 का है।
हिंदू मास एवं संवत्सर
कल दुष्टमुहूर्त , राहुकाल 10:35:51 से 12:17:35 तक, यमगण्ड 17:16:01 से 18:10:17 तक, तथा गुलिक काल 17:16:01 से 18:10:17 तक के बीच रहेगा।
कल का शुभ मुहूर्त
- कल का अभिजीत मुहूर्त 11:50:27 से 12:44:43 तक रहेगा।
- दिशा शूल कल पश्चिम दिशा में है, यात्रा से बचें।
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कल का चंद्रबल और ताराबल
कल मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ राशि वालों को चंद्रबल प्राप्त है। अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती सहित 20+ नक्षत्रों को ताराबल प्राप्त है।
आपका दिन मंगलमय हो!
नक्षत्र:
अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशीर्ष, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शततारका, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती। ये 27 नक्षत्र हैं और इसी क्रम में आते हैं। अर्थात चंद्रमा एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में एक ही क्रम में भ्रमण करता है। चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है वही उस दिन का नक्षत्र होता है।वार:
सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवारयोग:
विष्कुम्भा, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्यागत, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतिपात, वारियान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुक्ल, ब्रह्मा, इन्द्र, वैधताकरण:
किंस्तुघन, भाव, बल्व, कौलव, तैतुल, गरज, वणिज, विष्टि (भद्रा), शकुनि, चतुष्पाद, नागव।पक्ष:
कृष्ण पक्ष: जैसे-जैसे चंद्रमा का आकार छोटा होता जाता है, यह पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या में बदल जाता हैशुक्ल पक्ष: चंद्रमा का आकार बढ़ता है। यह दल अमावस्या से पूर्णिमा तक परिवर्तित हो जाता है
