सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X की ओर से सरकारी आदेशों पर कंटेंट हटाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की घोषणा के बाद भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। PTI/भाषा के मुताबिक सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा। अधिकारी की यह टिप्पणी X के मालिक एलन मस्क की हालिया घोषणा के बाद आई है।
X ने कंटेंट हटाने के आदेशों को पारदर्शी बनाने की कही बात
एलन मस्क ने हाल ही में X पर घोषणा की थी कि सरकारों की ओर से दिए जाने वाले सेंसरशिप या कंटेंट हटाने के अनुरोधों को अब यूजर्स के लिए अधिक स्पष्ट बनाया जाएगा। कंपनी की नई पारदर्शिता पहल के तहत यह जानकारी दी जा सकती है कि किसी कंटेंट को हटाने का अनुरोध किस सरकार की ओर से किया गया और इसके पीछे क्या कारण था।
इस पहल का उद्देश्य यूजर्स को यह समझने में मदद करना है कि किसी पोस्ट या अकाउंट पर सरकारी निर्देश के कारण कार्रवाई क्यों की गई है। X का मानना है कि इससे सरकारी कंटेंट हटाने के अनुरोधों को लेकर पारदर्शिता बढ़ सकती है।
IT मंत्रालय ने कहा- भारतीय कानूनों का पालन जरूरी
X की इस पहल को लेकर जब सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के रुख के बारे में पूछा गया, तो वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा। अधिकारी ने कहा कि कंटेंट हटाने से जुड़ी दो तरह की प्रक्रियाएं हैं। उन्होंने विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69(ए) के तहत जारी किए जाने वाले आदेशों का जिक्र किया। अधिकारी के मुताबिक, ऐसे आदेशों को गोपनीय रखा जाना जरूरी है और मंत्रालय इन आदेशों के बारे में विशेष रूप से बात नहीं करता।
एलन मस्क ने क्या कहा था?
एलन मस्क ने X पर अपनी हालिया पोस्ट में कहा था कि सरकारों की ओर से आवश्यक की जाने वाली सेंसरशिप को अब अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। कंपनी की नई पहल के तहत सरकारी अनुरोधों के संबंध में ज्यादा जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही गई है, हालांकि भारत सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म को देश में लागू कानूनों और उनके तहत जारी किए गए निर्देशों का पालन करना होगा।
किसान आंदोलन के दौरान भी हुआ था विवाद
X और भारत सरकार के बीच कंटेंट हटाने के आदेशों को लेकर पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। वर्ष 2024 में किसान आंदोलन से जुड़े कुछ अकाउंट और पोस्ट को ब्लॉक करने के सरकारी निर्देशों का X ने पालन किया था। हालांकि, प्लेटफॉर्म ने सार्वजनिक रूप से इन आदेशों पर असहमति जताई थी।
उस समय X ने कहा था कि ऐसे सरकारी निर्देशों को सार्वजनिक नहीं किए जाने से जवाबदेही की कमी और मनमाने फैसलों की आशंका पैदा हो सकती है। कंपनी ने सरकारी आदेशों में अधिक पारदर्शिता की जरूरत पर भी जोर दिया था।
‘सहयोग पोर्टल’ को लेकर भी आमने-सामने आ चुके हैं दोनों पक्ष
भारत सरकार और X के बीच ‘सहयोग पोर्टल’ को लेकर भी विवाद हो चुका है। यह पोर्टल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को कंटेंट हटाने या उसे ब्लॉक करने से जुड़े सरकारी निर्देश भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
X ने इस व्यवस्था को अतिरिक्त कानूनी सेंसरशिप का एक रूप बताया था। दूसरी ओर, सरकार का कहना रहा है कि यह ऑनलाइन कंटेंट को नियंत्रित करने और कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था है।
