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आप सरकार में मंत्री रहे सतेन्द्र जैन समेत छह गिरफ्तार, ACB ने की कार्रवाई; दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर में गड़बड़ी का आरोप

यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के STP को अपग्रेड और बेहतर बनाने के लिए जारी किए गए टेंडर में बड़े स्तर पर कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर की शर्तों में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक खास तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनी को फायदा मिल सके और दूसरी कंपनियों के लिए मुकाबला मुश्किल हो जाए।

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सतेन्द्र जैन गिरफ्तार

दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े टेंडर में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय, पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव और तीन निजी लोग नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा शामिल हैं। ACB ने सभी छह आरोपियों को 18 अगस्त को गिरफ्तार किया।

ACB के मुताबिक, यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के STP को अपग्रेड और बेहतर बनाने के लिए जारी किए गए टेंडर में बड़े स्तर पर कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर की शर्तों में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक खास तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनी को फायदा मिल सके और दूसरी कंपनियों के लिए मुकाबला मुश्किल हो जाए।

जांच में सामने आया कि जिस तकनीक को टेंडर में प्राथमिकता दी गई, उससे जुड़ी कंपनी के पक्ष में तकनीकी शर्तें तय करने का आरोप है। ACB का कहना है कि प्रस्तावित पायलट स्टडी भी नहीं कराई गई। इसके अलावा टेंडर में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और मीडिया से जुड़ी ऐसी शर्तें जोड़ी गईं, जिनसे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई। टेंडर की तकनीकी शर्तों में बदलाव और कई संशोधन जारी किए जाने की भी जांच की गई।

निजी लोगों और अधिकारियों के बीच संपर्क का आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक, निजी कंपनियों से जुड़े लोगों और कुछ सरकारी अधिकारियों के बीच लगातार बातचीत होती थी। इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच में टेंडर की शर्तों, संशोधन और दूसरे दस्तावेजों के आदान-प्रदान की बात सामने आई है। ACB का आरोप है कि बाद में इन्हीं शर्तों को STP के टेंडर में शामिल किया गया। जांच में इस पूरे मामले में निजी कंपनियों, बिचौलियों और सरकारी अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ की भी बात सामने आई है।

1.52 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत की जांच

ACB के मुताबिक, वित्तीय जांच में कथित रिश्वत और कमीशन के पैसे के लेन-देन का भी पता चला है। जांच एजेंसी का आरोप है कि तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनी से जुड़े पैसों को पहले कुछ निजी संस्थाओं के जरिए ट्रांसफर किया गया और इसके बाद सरकारी अधिकारियों तक पैसा पहुंचा।

ACB का दावा है कि दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन CEO उदित प्रकाश राय और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में करीब 1.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। एजेंसी के मुताबिक, यह रकम नागेंद्र यादव की फर्म AN Enterprises के जरिए पहुंची और बाद में इस पैसे का इस्तेमाल कथित तौर पर अचल संपत्ति खरीदने में किया गया। जांच में AN Enterprises को तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनी से जुड़े पैसों के लेन-देन से भी जोड़ा गया है।

व्हाट्सऐप और इलेक्ट्रॉनिक बातचीत भी जांच के दायरे में

जांच एजेंसी ने राजा कुमार कुर्रा, नागेंद्र यादव और अंकित श्रीवास्तव के बीच हुई बातचीत को भी जांच का हिस्सा बनाया है। इन बातचीत में बैठकों, टेंडर की शर्तों और संशोधन समेत STP प्रोजेक्ट से जुड़े कई मुद्दों का जिक्र होने की बात कही गई है। ACB का कहना है कि उपलब्ध सबूतों से संकेत मिलता है कि टेंडर की कुछ शर्तों को एक खास तकनीक उपलब्ध कराने वाली कंपनी के फायदे के हिसाब से तैयार या बदला गया।

यह मामला 11 मई 2024 को ACB थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है। FIR में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ IPC की धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं लगाई गई थीं। ACB ने कहा है कि मामले में अब तक सामने आए सबूतों के आधार पर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पैसों के पूरे लेन-देन, कथित रिश्वत और अपराध से हुई आय की जांच अभी जारी है।

Mohit Om
मोहित ओमauthor

जनमानस की खबर को पाठकों तक पहुंचाना ही एकमात्र लक्ष्य। एक दशक से ज्यादा पत्रकारिता का अनुभव। अपराध के पीछे की साजिश को बेपर्दा करने वाली हर खबर पर पैनी निगाह रखता हूँ।

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