Jyeshtha Month 2025: ज्येष्ठ माह बहुत ही पवित्र माह होता है। इस माह में शिव पूजा व हनुमान जी की उपासना का बहुत महत्व है। पूजा, पाठ व दान का बहुत महत्व है। यह माह पुण्य प्राप्ति व आध्यात्मिक उत्कर्ष का पुनीत व स्वर्णिम अवसर प्रदान करता है। शिव उपासना के रूप में यह माह प्रसिद्ध है। इस माह भगवान राम व कृष्ण की पूजा की जाती है। जीवन में संयम व त्याग बहुत आवश्यक है। हमें इस माह आलस्य व क्रोध पर विजय प्राप्त करके संयम पूर्वक जीवन जीते हुए हरि चरणों की भक्ति प्राप्त करनी है। जानिए इस महीने में किन उपायों को करके पुण्य की प्राप्ति कर सकते हैं।
गर्मी के कारण करें दान व पुण्य
इस माह से गर्मी तेजी से बढ़ना प्रारम्भ करती है। इस माह हम अपने घर के छतों पर विहंगों के लिए दाना पानी की व्यवस्था करें। गाय तथा गौशालाओं के लिए गुड़ व जल की व्यवस्था करें। एक दान पात्र बना लें व उसमें नियमित कुछ द्रव्य पूरे माह निकालते रहें। यही कार्य अन्न के लिए भी करें। नियमित एक व्यक्ति के भोजन के बराबर अन्न निकालते रहें।
करें शिवपुराण का पाठ व पूर्ण करें श्री रामचरितमानस
प्रातःकाल शिवपुराण का पाठ करें। श्री रामचरितमानस के सम्पूर्ण पाठ का संकल्प लें व प्रतिदिन मानस पाठ कर अंतिम दिवस विधिवत घर पर ही हवन कर दें।
प्रतिदिन करें हवन
ज्येष्ठ माह में हवन का बहुत महत्व है। प्रतिदिन हवन करें। कपूर से अपने घर के मंदिर में भगवान व सभी देवी देवताओं की आरती करें। सायंकाल लोहबान व कपूर जलाएं। हवन घर में ऐसे जगह करें जहां से धुआं आसानी से घर के बाहर निकल जाए।
पार्थिव पूजन व महामृत्युंजय अनुष्ठान
पार्थिव का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करें। जो लोग रोग से पीड़ित हैं, शनि की साढ़े साती या ढैया से प्रभावित हैं वो नियमित महामृत्युंजय मंत्र का जप करते रहें। शिव पुराण का नियमित पाठ इस माह बहुत ही पुण्यदायी है। जिन लोगों का मारकेश चल रहा है वो लोग घर में ही शिव अर्चना करें व मन से महामृत्युंजय मंत्र का स्वयं अनुष्ठान करते रहें।
ज्येष्ठ माह का हर मंगलवार व्रत रहें- ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार व्रत रहें। कहते हैं जो कोई इस महीने में पड़ने वाली सभी मंगलवार के विधि विधान व्रत रखता है उसके जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती।
