HDFC बैंक की लेटेस्ट एनुअल रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। इस वित्तीय वर्ष में बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर (Deputy MD) कैजाद भरूचा ने कमाई के मामले में अपने ही बॉस यानी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) शशिधर जगदीशन को भी पीछे छोड़ दिया है। वित्त वर्ष 2026 में कैजाद भरूचा कुल ₹17.14 करोड़ का भारी-भरकम पैकेज लेकर बैंक के 'हाईएस्ट-पेड एग्जीक्यूटिव' (सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले अधिकारी) बनकर उभरे हैं, जबकि इसी अवधि के दौरान एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन को कुल ₹15.13 करोड़ का पारिश्रमिक मिला है। कॉर्पोरेट जगत में आमतौर पर यह देखा जाता है कि कंपनी के शीर्ष पद यानी सीईओ की सैलरी सबसे अधिक होती है, लेकिन एचडीएफसी बैंक के इस सैलरी ढांचे ने बैंकिंग विश्लेषकों और बाजार के जानकारों को हैरान करने के साथ-साथ एक नई बहस छेड़ दी है कि कैसे प्रदर्शन, वरिष्ठता और विशिष्ट भूमिकाएं पारिश्रमिक के निर्धारण में सीईओ के पद से भी अधिक प्रभावी हो सकती हैं।
किसे कितना मिला पैसा?
अगर हम दोनों शीर्ष अधिकारियों की सैलरी के इस आंकड़े को बारीकी से समझें, तो कैजाद भरूचा के ₹17.14 करोड़ के कुल पैकेज में एक बड़ा हिस्सा उनके मूल वेतन (Base Salary), भत्ते, प्रदर्शन-आधारित बोनस और सबसे महत्वपूर्ण रूप से स्टॉक ऑप्शंस (ESOPs) के इनकैशमेंट या उनके मूल्य संवर्धन से जुड़ा हो सकता है, जो किसी भी बैंकिंग एग्जीक्यूटिव की कमाई को अचानक बढ़ा देता है। भरूचा लंबे समय से एचडीएफसी बैंक के थोक बैंकिंग और कॉर्पोरेट क्रेडिट पोर्टफोलियो को संभाल रहे हैं, जो बैंक के मुनाफे और परिसंपत्ति गुणवत्ता को बनाए रखने में सबसे रीढ़ की हड्डी माना जाता है; यही वजह है कि बोर्ड ने उनकी रणनीतिक भूमिका को देखते हुए यह शानदार पैकेज स्वीकृत किया है।
MD सीईओ को कितना मिला?
दूसरी तरफ, एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन का ₹15.13 करोड़ का पारिश्रमिक भी भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के सबसे महंगे पैकेजों में से एक है, जो उनके कुशल नेतृत्व और एचडीएफसी लिमिटेड के ऐतिहासिक विलय (HDFC Merger) के बाद बैंक को स्थिरता के साथ आगे ले जाने की उनकी जिम्मेदारी को दर्शाता है। आरबीआई (RBI) के सख्त नियमों के तहत किसी भी बैंक के सीईओ और पूर्णकालिक निदेशकों की सैलरी और बोनस को रेगुलेटर की मंजूरी मिलना अनिवार्य होता है, जिससे यह साफ है कि यह पारिश्रमिक बैंक के वित्तीय प्रदर्शन और विनियामक दिशानिर्देशों के पूरी तरह अनुकूल है।
एचडीएफसी बैंक के इन दोनों दिग्गजों की करोड़ों की सैलरी की यह खबर ऐसे समय में आई है जब पूरा बैंकिंग सेक्टर मार्जिन (NIM) पर दबाव और डिपॉजिट ग्रोथ (जमा राशि में बढ़ोतरी) को लेकर कड़े मुकाबले का सामना कर रहा है। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में भी अपने टॉप मैनेजमेंट को इस स्तर का इंसेंटिव और रिटेंशन पैकेज देना यह दर्शाता है कि बैंक अपने शीर्ष नेतृत्व को बनाए रखने के लिए कितना गंभीर है। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया और बिजनेस सर्कल्स में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और सैलरी स्ट्रक्चर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि यह केस स्टडी बन चुका है कि किसी संगठन में नंबर-2 के पद पर बैठा व्यक्ति भी अपने असाधारण योगदान के दम पर नंबर-1 से ज्यादा कमाई कर सकता है।
