Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि की अष्टमी आज, किस महाविद्या का अष्टमी को करें पूजन, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व लाभ
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 26, 2026, 09:41 AM IST
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि के आठवें दिन अष्टमी तिथि को दस महाविद्याओं में 8वीं महाविद्या मां बगलामुखी का पूजन किया जाता है। 26 जनवरी 2026 को माघ माह की गुप्त नवरात्रि की अष्टमी है। मां बगलामुखी का पूजन शुत्र नाश करता है। मां के पूजन से सभी प्रकार की बाधाओं और कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। इस कारण मां को शत्रु नाशक भी कहा गया है। मां का स्वरूप पीला होने के कारण मां को पीतांबरा माई कहा जाता है। आइए जानते हैं कि मां की पूजा विधि क्या है?
मां बगलामुखी पूजा विधि
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि के दौरान दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। इन्हीं महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी हैं, जिनकी पूजा गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि को विशेष रूप से की जाती है। वर्ष 2026 में माघ माह की गुप्त नवरात्रि की अष्टमी 26 जनवरी को पड़ रही है। इस दिन मां बगलामुखी की साधना शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी, नकारात्मक शक्तियों और मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। तंत्र और साधना मार्ग में मां बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की देवी कहा गया है। मां को पीतांबरा माई के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि मां का स्वरूप पीला है।
कौन हैं मां बगलामुखी?
मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें ‘स्तंभन शक्ति’ की देवी माना जाता है, यानी ऐसी शक्ति जो शत्रु की बुद्धि, वाणी और कर्म को रोकने की क्षमता रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब जीवन में बार-बार विघ्न, विरोध, षड्यंत्र या अन्याय का सामना करना पड़ता है, तब मां बगलामुखी की उपासना अत्यंत फलदायी होती है। मां बगलामुखी को पीतांबरा देवी भी कहा जाता है और इनकी पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है।
मां बगलामुखी का स्वरूप और महत्व
मां बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और रहस्यमय माना गया है। वे पीले वस्त्र धारण करती हैं और पीले आसन पर विराजमान रहती हैं। एक हाथ से वे शत्रु की जीभ को पकड़े रहती हैं और दूसरे हाथ में गदा धारण करती हैं, जो शत्रु की शक्ति को समाप्त करने का प्रतीक है। उनका यह स्वरूप यह दर्शाता है कि वे नकारात्मक शक्तियों, झूठ, अन्याय और अधर्म को नियंत्रित करने वाली देवी हैं। साधना शास्त्रों में मां बगलामुखी की उपासना को त्वरित फल देने वाली साधना माना गया है।
मां बगलामुखी पूजा मुहूर्त 2026?
वर्ष 2026 में मां बगलामुखी का पूजन माघ माह की गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि, 26 जनवरी 2026 को किया जाएगा। इस दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:26 से 06:19 बजे तक रहेगा, जबकि प्रातः संध्या का समय 05:52 से 07:12 बजे तक होगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:12 से 12:55 बजे तक और विजय मुहूर्त 02:21 से 03:04 बजे तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 05:53 से 06:19 बजे तक तथा सायाह्न संध्या 05:55 से 07:15 बजे तक मानी जाएगी। इसके अलावा अमृत काल 27 जनवरी की सुबह 06:37 से 08:08 बजे तक और निशिता मुहूर्त रात 12:07 से 01:00 बजे तक रहेगा।
मां बगलामुखी की पूजा विधि
मां बगलामुखी की पूजा में शुद्धता और नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजा के दिन साधक को प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थान पर पीले कपड़े का आसन बिछाकर मां बगलामुखी की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। इसके बाद पीले फूल, पीले फल, हल्दी, चने की दाल, पीले मिष्ठान और पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। दीपक में घी या तिल का तेल जलाकर मां का ध्यान किया जाता है और मंत्रों का जप किया जाता है। पूजा के अंत में मां से जीवन की बाधाओं को समाप्त करने की प्रार्थना की जाती है।
मां बगलामुखी के मंत्र
मां बगलामुखी के मंत्र साधना मार्ग में अत्यंत प्रभावशाली माने गए हैं। इन मंत्रों के नियमित जप से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है और शत्रु पक्ष कमजोर पड़ता है। सामान्य उपासना के लिए ‘ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा’ मंत्र का जप किया जाता है। मंत्र जप के दौरान पूर्ण एकाग्रता और श्रद्धा आवश्यक मानी जाती है। मां की साधना बेहद शक्तिशाली मानी गई है। इस कारण गुरु की आज्ञा की आवश्यकता होती है।
मां बगलामुखी की उत्पत्ति की पौराणिक कथा
पौराणिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि एक समय सृष्टि में अत्यंत भयानक संकट उत्पन्न हो गया था। आकाश, पृथ्वी और पाताल, तीनों लोकों में अशांति फैल चुकी थी। प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया था, तेज आंधियां चलने लगी थीं, समुद्र अपनी मर्यादा तोड़कर उफान पर आ गया था और चारों दिशाओं में विनाश का भय दिखाई देने लगा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्रलय का समय आ गया हो और संपूर्ण सृष्टि नष्ट होने वाली हो।
इस भयावह स्थिति से देवता, ऋषि और सभी दिव्य शक्तियां अत्यंत चिंतित हो गईं। सभी ने मिलकर भगवान विष्णु और भगवान शिव से प्रार्थना की कि इस संकट से सृष्टि की रक्षा की जाए। देवताओं की करुण पुकार सुनकर आदिशक्ति ने सृष्टि की रक्षा के लिए अवतरण का संकल्प लिया।
कहा जाता है कि उसी समय देवी आदिशक्ति हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुईं। हरिद्रा सरोवर पीले रंग की दिव्य ऊर्जा से प्रकाशित था और उसी दिव्य प्रकाश से मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ। उनका स्वरूप तेजस्वी था, वे पीत वस्त्र धारण किए हुए थीं और उनके चेहरे पर अद्भुत शांति और कठोरता दोनों का भाव था। उनके प्रकट होते ही चारों ओर फैली विनाशकारी शक्तियां स्तंभित हो गईं और सृष्टि में फैल रही अराजकता थमने लगी।
मां बगलामुखी ने अपनी अद्भुत स्तंभन शक्ति से उन सभी नकारात्मक और प्रलयकारी शक्तियों को रोक दिया, जो सृष्टि को नष्ट करने पर तुली थीं। उनकी शक्ति से न केवल प्रकृति का संतुलन पुनः स्थापित हुआ, बल्कि देवताओं के भय का भी नाश हो गया। इसी कारण उन्हें स्तंभन शक्ति की देवी कहा गया, जो शत्रु की वाणी, बुद्धि और कर्म को निष्क्रिय कर देने में सक्षम हैं।
एक अन्य कथा के अनुसार, जब असुरों का अत्याचार बढ़ने लगा और वे अपने छल, कपट और झूठी वाणी से देवताओं को पराजित करने लगे, तब देवताओं ने मां बगलामुखी की उपासना की। मां ने प्रकट होकर असुरों की वाणी और बुद्धि को स्तंभित कर दिया, जिससे वे अपने ही शब्दों और निर्णयों में उलझ गए और देवताओं को विजय प्राप्त हुई। इस कथा से यह संदेश मिलता है कि मां बगलामुखी अधर्म, अन्याय और छल को रोकने वाली शक्ति हैं।
पौराणिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि मां बगलामुखी की साधना से केवल बाहरी शत्रु ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर छिपे नकारात्मक विचार, भय, क्रोध और भ्रम भी शांत हो जाते हैं। इसलिए उनकी उपासना को केवल शत्रु नाश तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि आत्मबल और मानसिक स्थिरता प्रदान करने वाली साधना भी कहा गया है।
इसी कारण गुप्त नवरात्रि में मां बगलामुखी की विशेष उपासना की जाती है। माना जाता है कि इन दिनों की गई साधना से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं और साधक को संकटों से रक्षा, आत्मविश्वास और विजय का आशीर्वाद देती हैं।
मां बगलामुखी की पूजा से मिलने वाले लाभ
मां बगलामुखी की पूजा से जीवन में चल रही परेशानियों से राहत मिलने की मान्यता है। विशेष रूप से शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के मामले, झूठे आरोप, मानसिक तनाव और भय से मुक्ति के लिए यह पूजा लाभकारी मानी जाती है। साधक की वाणी में प्रभाव बढ़ता है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। तांत्रिक दृष्टि से मां बगलामुखी की साधना से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
गुप्त नवरात्रि में मां बगलामुखी की विशेष उपासना
गुप्त नवरात्रि के दौरान मां बगलामुखी की उपासना को अत्यंत गोपनीय और प्रभावशाली माना गया है। इस समय की गई साधना शीघ्र फल देती है। साधक यदि नियमपूर्वक मंत्र जप, ध्यान और पूजा करता है तो मां की कृपा से जीवन में चल रहे बड़े संकट भी शांत हो जाते हैं। इसलिए माघ माह की गुप्त नवरात्रि की अष्टमी को मां बगलामुखी की उपासना विशेष रूप से की जाती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।