Sawan Shivratri 2026: शिव भक्तों के लिए सावन शिवरात्रि का दिन बेहद खास होता है, जिसका व्रत हर साल श्रावण यानी सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। इस बार 11 अगस्त 2026, वार मंगलवार को सावन शिवरात्रि है। जो लोग पूरे सावन व्रत नहीं रख पाते हैं, वो भी इस दिन उपवास रखते हैं। शिव जी के साकार (मूर्ति) और निराकार रूप (शिवलिंग) की पूजा करते हैं। मान्यता है कि सावन शिवरात्रि के दिन शिव उपासना करने से पूर्व जन्म के पाप भी नष्ट होते हैं। साथ ही शिव कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और विभिन्न इच्छाओं की पूर्ति होती है। यदि आप भी सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का अभिषेक करने वाले हैं तो सबसे पहले इससे जुड़े नियम जान लें।
शिवलिंग पर कैसा दूध चढ़ाएं? (shivling par kaisa dudh chadhana chahie)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि या किसी भी दिन शिवलिंग पर कभी भी उबला हुआ दूध नहीं चढ़ाना चाहिए। दूध को उबालने से उसके पौष्टिक तत्व और प्राकृतिक संरचना बदल जाती है, जिससे वो शुद्ध नहीं रहता है। इसलिए शिवलिंग पर उबले हुए दूध की जगह हमेशा ठंडा या सामान्य कच्चा दूध अर्पित करें।
शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए? (shivling par sabse pahle kya chadhana chahie)
शास्त्रों में बताया गया है कि शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल चढ़ाना चाहिए। शुद्ध जल की जगह आप गंगाजल भी अर्पित कर सकते हैं। जल अर्पित करने के बाद पंचामृत चढ़ाएं और फिर शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाकर बेलपत्र, फल, फूल, धतूरा, भांग और भस्म आदि पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।
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शिवलिंग के अभिषेक से जुड़े नियम (shivling abhishek ke niyam)
- अभिषेक करते समय भक्त का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
- बैठकर अभिषेक करना चाहिए।
- अभिषेक के दौरान मन को शांत रखें।
- अभिषेक करते समय निरंतर शिव जी के मंत्रों का जाप करते रहें।
- दाहिने यानी सीधे हाथ से अभिषेक करें।
- तांबे, कांसे, पीतल, श्रृंगी या चांदी के पात्र से ही अभिषेक करें।
- अभिषेक का जल माथे पर जरूर लगाएं।
- अभिषेक के जल को पीना नहीं चाहिए।
- जल या दूध की धारा धीमी और पतली होनी चाहिए।
अभिषेक करते समय कौन से मंत्र बोलें? (abhishek karte samay kya bolna chahiye)
- पंचाक्षरी मंत्र- ॐ नमः शिवाय
- शिव गायत्री मंत्र- तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
- महामृत्युंजय मंत्र- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
- दूध से अभिषेक करते समय- पयः पृथिवी पय ओषधीषु पयो दिव्यन्तरिक्षे पयोधाः। पयस्वतीः प्रदिशः संत्वह्यं कामधेनुसमुद्भूतं सर्वेषां जीवनं परमम्। पयस्नानाय समर्पयामि।
- शहद या घी से अभिषेक करते समय- ॐ हौं जूं सः त्र्यम्बकाय स्वाहा
शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए? (shivling par kya nahi chadhana chahiye)
पौराणिक शास्त्रों में बताया गया है कि शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, कुमकुम, टूटे हुए चावल, केवड़े के फूल, सूखे या फटे हुए बेलपत्र, बासी या सूखे फूल, लाल रंग के फूल, चंपा के फूल, तुलसी के पत्ते, केतकी के फूल, केला, नारियल पानी, अनार, जामुन, पपीता, कढ़ी पत्ता, किसी भी प्रकार की तामसिक सामग्री और सफेद सरसों अर्पित करना वर्जित है। इसके अलावा शिवलिंग पर शंख से जल भी अर्पित नहीं करना चाहिए।
