Shiv Chaudas Kab Hai 2026 Date: सावन में जब कांवड़िये गंगाजल लेकर शिवालय पहुंचते हैं तो आम बोलचाल में इसे शिव चौदस कहा जाता है। पंचांग में यही दिन सावन शिवरात्रि या श्रावण शिवरात्रि के नाम से दर्ज होता है। इस बार चतुर्दशी तिथि दो तारीखों को छू रही है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि 2026 में शिव चौदस 11 अगस्त को है या 12 अगस्त को। आइए जानते हैं कि सही डेट क्या है और क्या इस बार भद्रा के साए में मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि।
शिव चौदस कब है 2026 में
साल 2026 में सावन की शिव चौदस यानी सावन शिवरात्रि 11 अगस्त, मंगलवार को मनाई जाएगी। सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 12 अगस्त की रात 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। चतुर्दशी तिथि में रात्रि पूजा का संयोग 11 अगस्त को मिल रहा है, इसलिए व्रत, जलाभिषेक और शिवरात्रि की पूजा इसी दिन की जाएगी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि 12 अगस्त को चतुर्दशी तिथि रात 1:52 बजे ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए केवल तिथि के 12 अगस्त तक रहने के कारण शिवरात्रि को लेकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं है।
शिव चौदस और सावन शिवरात्रि क्या अलग हैं
शिव चौदस कोई अलग पर्व नहीं है। उत्तर भारत के कई हिस्सों, खासकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को लोग बोलचाल में शिव चौदस कहते हैं। यही सावन की मासिक शिवरात्रि है।
इसी दिन कांवड़ यात्रा भी अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचती है और शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और दूसरे पवित्र स्थानों से लाया गया गंगाजल शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। यही कारण है कि सावन की दूसरी तिथियों के मुकाबले इस दिन शिव मंदिरों में अलग ही रौनक दिखाई देती है।
निशिता काल में कब करें शिव पूजा
शिवरात्रि में दिन के जलाभिषेक के साथ मध्यरात्रि की पूजा का खास महत्व माना जाता है। 11 अगस्त की रात 11 बजकर 59 मिनट से 12 अगस्त की रात 12 बजकर 43 मिनट तक निशिता काल रहेगा। यानी भक्तों को मध्यरात्रि की विशेष पूजा के लिए लगभग 43 मिनट का समय मिलेगा।
जो लोग चारों प्रहर की पूजा नहीं कर सकते, वे निशिता काल में शिवलिंग का जलाभिषेक करके बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं। पूजा में देर तक बैठ पाना संभव न हो तो शांत मन से ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करना भी सरल विकल्प है।
क्या शिव चौदस पर भद्रा रहेगी
भद्रा 10 अगस्त 2026 की रात 10 बजकर 22 मिनट से शुरू होकर 11 अगस्त को सुबह 11 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इस तरह सावन शिवरात्रि का आरंभ तो भद्रा के साए में होगा लेकिन हालांकि शिवरात्रि की मुख्य रात्रिकालीन पूजा और निशिता काल पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा।
अगर परिवार में भद्रा का विशेष विचार किया जाता है तो सावन शिवरात्रि का विशेष अनुष्ठान सुबह 11:34 बजे के बाद किया जा सकता है। शिवलिंग पर सामान्य रूप से जल चढ़ाने और नाम जप करने को लेकर अपने क्षेत्र के पंचांग या मंदिर के आचार्य की परंपरा का पालन करना बेहतर रहेगा।
शिव चौदस पर कैसे करें जलाभिषेक
सुबह स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें। शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल या गंगाजल चढ़ाएं। इसके बाद बेलपत्र, सफेद फूल, चंदन, धतूरा और फल अर्पित किए जा सकते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह कटा-फटा न हो और उसका चिकना भाग शिवलिंग की ओर रहे।
शिव पूजा को बहुत कठिन बनाने की जरूरत नहीं है। अगर दूध, शहद या अन्य पूजन सामग्री उपलब्ध नहीं है तो केवल एक लोटा साफ जल, बेलपत्र और सच्ची श्रद्धा भी पर्याप्त मानी जाती है। पूजा का मूल भाव मन को शांत करना है, केवल सामग्री की लंबी सूची जुटाना नहीं।
शिव चौदस का व्रत रखने वाले क्या खाएं
व्रत रखने वाले अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार या केवल सात्विक भोजन वाला व्रत कर सकते हैं। फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना और सेंधा नमक से बना भोजन लिया जा सकता है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, डायबिटीज के मरीजों या नियमित दवा लेने वालों को निर्जल व्रत नहीं रखना चाहिए। उनके लिए पूजा, मंत्र-जप और सात्विक आहार के साथ व्रत करना व्यावहारिक रहता है।
