अध्यात्म

Ekadashi Vrat June 2023: जून में पड़ेगी योगिनी एकादशी और देवशयनी एकादशी, जानिए दोनों की डेट और महत्व

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated May 24, 2023, 05:58 PM IST

Ekadashi June 2023: जून में दो एकादशी पड़ेगी एक योगिनी एकादशी दूसरी देवशयनी एकादशी। इन दोनों ही एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। ये एकादशी आषाढ़ मास (Ashad Month) में पड़ती हैं जिस कारण इन्हें आषाढ़ी एकादशी (Ashadi Ekadashi 2023) भी कहते हैं। जानिए आषाढ़ी एकादशी की डेट।

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Ashadi Ekadashi Kab Hai 2023: जून एकादशी की डेट

Ashadi Ekadashi Vrat June 2023: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। एक महीने में दो बार ये व्रत पड़ता है। एक शुक्ल पक्ष की एकादशी कही जाती है दूसरी कृष्ण पक्ष की एकादशी कहलाती है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है जो व्यक्ति सच्चे मन से ये व्रत करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। जून में दो एकादशी व्रत पड़ेंगे। एक योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi 2023) दूसरी देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2023)। जानिए दोनों एकादशियों की डेट और महत्व।

योगिनी एकादशी 14 जून 2023, बुधवार (Yogini Ekadashi 2023 Date)

योगिनी एकादशी में भगवान श्री नारायण की पूजा की जाती है। कहते हैं इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है। इतना ही नहीं इस व्रत के प्रभाव से किसी के दिये हुए श्राप का भी निवारण हो जाता है। योगिनी एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। 14 जून बुधवार के दिन ये एकादशी पड़ रही है।

देवशयनी एकादशी 29 जून, गुरुवार (Devshayani Ekadashi 2023 Date)

आषाढ़ मास में आने वाली देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। इस एकादशी को हरिशयनी एकादशी और पद्मनाभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं अनुसार इस एकादशी के दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और इस दौरान सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव पर आ जाती है। 29 जून को ये एकादशी पड़ रही है।

एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए? (Ekadashi Ke Din Kya Nhi Karna Chaiye)

एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है। इस दिन अपने आप को शांत रखने की कोशिश करें। किसी पर गुस्सा न करें। इस दिन मदिरापान या मांस खाना वर्जित है। किसी से झूठ न बोलें। एकादशी के दिन पान सुपारी का सेवन नहीं करना चाहिए।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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